बरेली। बहुचर्चित हिमांशु एनकाउंटर मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायाधीश उमेश चंद्र पांडेय की अदालत में हुई। सीबीसीआईडी के तत्कालीन निरीक्षक ने अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखा। अदालत ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 22 जून तय की है।
छह जनवरी 2006 को फरीदपुर थाना क्षेत्र में गुलाबनगर गांव के पास 18 वर्षीय हिमांशु का एनकाउंटर कर दिया गया था। हिमांशु अपने दो दोस्तों के साथ क्रिकेट मैच खेलने बाइक पर जा रहा था। उधर, पांच जनवरी की रात तिलहर के एक व्यापारी के यहां हुई डकैती के बाद शाहजहांपुर पुलिस ने नाकाबंदी कर रखी थी। चेकिंग को निकले एसओ कटरा ने हिमांशु की बाइक रुकवाना चाही। तीन सवारी होने के कारण हिमांशु ने बाइक रोकने के बजाय फरीदपुर की तरफ दौड़ा दी। एसओ कटरा ने हिमांशु का पीछा किया। आरोप है कि फरीदपुर क्षेत्र के गांव गुलाबनगर के पास पुलिस ने एनकाउंटर कर निर्दोष हिमांशु की हत्या कर दी।
हिमांशु शाहजहांपुर के दिलजाक मोहल्ला निवासी और आर्डिनेंस फैक्ट्री के दीवान अशोक गिहार का बेटा था। अशोक गिहार ने अपने बेटे हिमांशु की हत्या का आरोप पुलिस पर लगाते हुए थाना फरीदपुर में तहरीर दी, फिर जिले के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए थे, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आखिर में शाहजहांपुर के दौरे पर आए प्रमुख सचिव के आदेश पर 19 अगस्त 2006 को वहीं सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें शाहजहांपुर के मीरानपुर कटरा एसओ रहे दिनेश कुमार सिंह, सिपाही कमलेश, सुरेश व अंजलि पांडेय को नामजद किया गया था। चूंकि घटना स्थल बरेली के फरीदपुर थाना क्षेत्र था, जिससे मुकदमा फरीदपुर को ट्रांसफर कर दिया गया था। बाद में प्रमुख सचिव गृह के आदेश पर यह मुकदमा सीबीसीआईडी ट्रांसफर कर दिया गया था। इस बहुचर्चित मामले में सीबीसीआईटी ने विवेचना पूरी करने के बाद कटरा थाने के तत्कालीन एसओ दिनेश कुमार सिंह, सिपाही कमलेश, सुरेश व चालक अंजनी पांडेय के खिलाफ हत्या के आरोप में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। आरोपी पुलिस कर्मी जेल जाने के बाद हाईकोर्ट के आदेश से जमानत पर रिहा हुए।
हिमांशु के पिता अशोक गिहार ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मियों ने खुद को बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए। उन्हें लालच भी दिया गया और धमकाया भी। कई गवाहों के खिलाफ झूठे मुकदमे लिखाए गए। उन्हें धमकाया और लालच दिया गया। दबाव में आकर 11 गवाह उनके पक्ष में हो गए। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों की गवाही हो चुकी है, जिनमें दो चश्मदीद गवाह शामिल हैं। सोमवार को सीबीसीआइडी के तत्कालीन निरीक्षक और इस मुकदमे के विवेचक रहे अहिवरन सिंह ने अदालत पहुंचकर गवाही दी। अगली सुनवाई 22 जून को होगी।