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खरसरा-खतौनी खुरचन कांड : साहब की नहीं सुनते तो आपकी क्या सुनेंगे खतौनियां खुरचवाने वाले

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बरेली। फरीदपुर में सैकड़ों बीघा जमीनों की खतौनियां खुरचवा दी गईं। नवाबगंज में किसान की सौ बीघा जमीन का रिकॉर्ड खुर्दबुर्द करके उसे दूसरों के नाम करा दिया गया। जांच में राजस्व निरीक्षक से लेकर नीचे तक सरकारी स्टाफ और बाहरी लोग दोषी बताए गए। यानी खतौनियां खुरचवाने वाले रिकॉर्ड रूम में बैठे अफसर-स्टाफ में ही हैं। ये लोग आम आदमी की तो नहीं सुनते, अपने साहब की भी नहीं सुनते। तभी तो कई महीने पहले मुआयने में पकड़ी गई खामियों की रिपोर्ट कमिश्नर को नहीं भेजी गई। नवाबगंज कांड के चर्चा में आने पर कमिश्नर ने जांच रिपोर्ट न भेजने पर अफसरों को सख्ती से कहा है।
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700 बीघा जमीनों के मालिक खतौनियों में बदल गए.. खेल अभी जारी
 सरकारी रिकॉर्ड रूम में खतौनियों को खुरचवाने वाला रैकेट की निगाहें बरेली और फरीदपुर तक ही नहीं बल्कि कटरा तक की सीमा में आने वाली उन जमीनों पर भी जिनका राजस्व क्षेत्र बरेली जिले से जुड़ा हुआ है। इस रैकेट के सरगना का ठिकाना फतेहगंज पूर्वी में हैं जिनका नेटवर्क सरकारी स्टाफ में इतना पुख्ता है कि फतेहगंज पूर्वी के चेयरमैन से लेकर कटरा के पूर्व विधायक तक के खेतों को खतौनियां खुरचवाकर अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। अभी तक जो शिकायतें हुईं हैं, उनके मुताबिक यह रैकेट बरेली से शाहजहांपुर के बीच हाईवे किनारे की आबादी वाली 700 बीघे से ज्यादा जमीन की खतौनियां रिकार्ड रूम में खुरचवा चुका है। कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन की कोशिश इन मामलों को ज्यादा उछलने न देने की है लिहाजा खतौनियां खुरचवाकर जमीनें कब्जाने का यह खेल बंद होने के आसार भी नहीं लग रहे हैं।
फरीदपुर में खतौनियां खुरचकर जमीनों की मिल्कियत बदलवाने का मामला मई 2018 में अमर उजाला ने उठाया था। इसके बाद फतेहगंज पूर्वी के अख्तदार अली, शफायत अली, नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन रिजवान बेग, कटरा के पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप सिंह मुन्ना और राजेंद्र प्रसाद मिश्रा की ओर से खतौनियां खुरचकर जमीनों पर कब्जा किए जाने की शिकायतें की गईं। प्रशासन ने जब जांच पड़ताल की तो इसमें फतेहगंज पूर्वी के ही आबिद बेग के चार बेटे वाहिद बेग, ताहिर बेग, मोहम्मद बेग, आसिव बेग और हामिद बेग के दो बेटों जाहिद बेग और शाहिद बेग के नाम सामने आए थे। इन सभी छह लोगों के खिलाफ बरेली की कोतवाली और थाना फतेहगंज पूर्वी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन विवेचना लटका दी। इस बीच आरोपी मामला दबाने के लिए भरपूर कोशिश करते रहे। कई बार शिकायत करने वालों और खतौनी खुरचकर जमीनों पर कब्जा किए बैठे लोगों के बीच मारपीट और गोली तक चलीं। लंबे समय बाद पुलिस ने खतौनी खुरचवाने के आरोपियों को जेल भेज दिया। अब तक सभी आरोपी जेल में हैं मगर फिर भी इस गिरोह का सरकारी तंत्र पर इस कदर दबाव है कि खतौनियों पर जालसाजी से चढ़ाए गए नाम हटे नहीं हैं। जमीनों के असली मालिक तहसीलों से लेकर कलक्ट्रेट तक चक्कर काट रहे हैं मगर खतौनियाें पर उनका नाम नहीं चढ़ पा रहा है।

खतौनियां खुरचने वाले कर्मचारी भी जांच में हो गए बरी
खतौनियाें में खेल करने वाले गिरोह के इशारे पर रिकार्ड रूम से राजस्व रिकार्ड देकर उनकी मदद करने में चार कर्मचारी चिह्नित हुए थे। इनके खिलाफ फरीदपुर और बरेली कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी, लेकिन न सिर्फ ये चारों पुलिस की विवेचना में बरी हो गए बल्कि विभागीय जांच में भी इन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया। खतौनी खुरचकर दूसरों के नाम दर्ज कराने में मदद करने पर सबसे पहले मई 2018 में फरीदपुर तहसील के आरके रामऔतार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। मगर विभागीय जांच में उन्हें न सस्पेंड किया गया न कोई और कार्रवाई हुई। बरेली में खतौनी खुरचने के मामले में एआरके विनोद कुमार, एआरके शैली जौहरी और मुख्य लिपिक ऊषा जैना के खिलाफ कोेतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामला गरम होने पर उनके इधर-उधर ट्रांसफर कर दिए गए। कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं हुई। इनमें एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है। दो रिटायर हो चुके हैं। एक नौकरी कर रही हैं।

पिछले साल ईद पर चली गोलियां
खतौनी खुरचकर दूसरों की जमीन अपने नाम दर्ज करने वाले आरोपी पिछले साल जेल से जमानत पर छूटकर आए थे। इनमें तीन से चार आरोपियों ने फतेहगंज पूर्वी में ईद के दिन जमीन पर कब्जे को लेकर प्रयास किए। इस पर शिकायतकर्ताओं ने झगड़ा हुआ। दोनों पक्षों में गोली भी चली। बाद में सभी आरोपी दोबारा जेल चले गए। तब से अब तक सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
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