बरेली। गर्भवती के बेहतर उपचार और देखभाल के लिए सरकार ने तमाम सुविधाएं दी हैं। जिला अस्पताल में निशुल्क प्रसव, टीकाकरण और जिला अस्पताल तक लाने ले जाने के लिए 108 और 102 सरकारी एंबुलेंस सेवा। शुरुआत से ही उनकी देखभाल के लिए गांवों में आशा बहुओं की नियुक्ति भी की गई ताकि वे समय पर गर्भवती को जिला महिला अस्पताल तक पहुंचाएं। मगर कमाई के चक्कर में आशा बहुएं गर्भवती और उनके परिजन को बरगलाकर जिला अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल का रास्ता दिखा रही हैं। बताया जाता है कि इसके बदले निजी अस्पताल वाले मरीज के इलाज से मिलने वाले धन में 10-15 प्रतिशत कमीशन इन आशा बहुओं को देते हैं।
जिला महिला अस्पताल में पिछले सप्ताह 108 व 102 एंबुलेंस के जरिये कुछ महिलाएं प्रसव कराने पहुंचीं। वह भर्ती भी हुईं। प्रारंभिक इलाज भी हुआ। अस्पताल प्रशासन नार्मल डिलीवरी कराने की तैयारी में था लेकिन गर्भवती के परिजन अचानक ही छुट्टी कराकर निजी अस्पताल जाने लगे। समझाने पर भी नहीं माने। कई बार इस तरह का मामला सामने आने पर सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने पड़ताल की तो चार दिन पहले उन्होंने दो आशाओं को तीमारदारों के कान में फुसफुसाते देख लिया। पूछताछ की तो मरीज और आशा बहू दोनों ही मुकर गए। मगर गर्भवती के जाने की जिद पर उन्हें मामले को समझते देर नहीं लगा। सीएमएस ने इस मामले में अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवाएं, बरेली मंडल को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है और ऐसा करने वाली आशाओं को चिह्नित कराकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इसकी प्रति मुख्य चिकित्साधिकारी बरेली को भी भेजी है। पत्र में उन्होंने कहा कि आशा बहुओं के इस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल होने के साथ ही प्रसूता के धन की बर्बादी भी हो रही है।