बरेली। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही दिन कुछ ऐसे लोगों ने भी नामांकन पत्र खरीदे कि पार्षदी से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ने वाले काका जोगेंद्र सिंह धरतीपकड़ की यादें ताजा हो गईं। दरअसल बृहस्पतिवार को नामांकन पत्र खरीदने वालों मे टीचर और मामूली प्राइवेट नौकरी करने शख्स के साथ छोटे किसान भी शामिल थे। पर्चा खरीदने के बाद इन सभी का कहना था कि लोकतंत्र में सभी को वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार है। उसी का वह इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले दिन नामांकन कराने वाले नरेशपाल गुप्ता की भी कोई मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है।
आंवला सीट से पर्चा भरने वाले रामेंद्र शर्मा हासीगंज, सिसैया गोसाई, दातागंज, बदायूं के रहने वाले हैं। वह बागपत के एक संस्कृत महाविद्यालय में टीचर हैं। भारतीय नौजवान दल से चुनाव लड़ने जा रहे रामेंद्र का कहना है कि देश और समाज को शिक्षित और सभ्य नेता की जरूरत है, जिनका चुनाव जीतने के बाद भी जनता से जुड़ाव रहे। जनता उनसे सीधे अपनी बात भी कह सके। इसी तरह बरेली सीट से राजेश कुमार ने भी लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदा है। एमए पास राजेश प्राइवेट नौकरी करते हैं। बेहद सामान्य कपड़ों में वह पैदल ही नामांकन पत्र लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि चुनाव में धनवान या बाहुबलियों का ही बोलबाला नहीं होना चाहिए। कोई आम व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है। इसकी सोच के साथ उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। इसी तरह पैगानगरी, मीरगंज निवासी लईक अहमद मंसूरी ने आंवला और बरेली दोनों ही सीट से चुनाव लड़ने के लिए पर्चे लिए हैं। उनका कहना है कि उनके पास सिर्फ डेढ़ बीघा जमीन है। यही रोजी-रोटी का जरिया है। उन्होंने 1991 से राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। दो बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके लईक अब छठी बार चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।