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तीन सीटों पर हाथी, दो सीटों पर नहीं दिखेगी साइकिल

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बरेली। बीते पांच साल की तुलना में 2019 के लोकसभा चुनाव कई मायनों में दिलचस्प होने जा रहे हैं। पांच साल पहले रुहेलखंड मंडल की पांचों सीटों पर साइकिल और हाथी पूरे दमखम से चुनाव लड़ रहे थे। मगर, इस बार सपा-बसपा गठबंधन होने से मंडल की बरेली, पीलीभीत और बदायूं लोकसभा सीट पर बसपा यानी कि हाथी चुनाव चिह्न गायब रहेगा। इन सीटों पर केवल सपा प्रत्याशी ही मैदान में हैं। वहीं दूसरी ओर आंवला और शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर सपा के प्रत्याशी यानी साइकिल चुनाव चिह्न नजर नहीं आएगा।
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बरेली लोकसभा सीट पर वर्ष 2014 में बसपा प्रत्याशी के तौर पर उमेश गौतम को 1 लाख 6 हजार 49 वोट मिले थे और यह पार्टी तीसरे स्थान पर रही थी। सपा प्रत्याशी आयशा इस्लाम 2 लाख 77 हजार 573 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रही थीं। वहीं आंवला लोकसभा में उस समय के सपा प्रत्याशी सर्वराज सिंह 2 लाख 71 हजार 207 वोट पाकर दूसरे स्थान पर थे। यहां से बसपा प्रत्याशी सुनीता शाक्य को महज 1 लाख 89 हजार 954 वोट ही मिल पाए थे। मगर, इस बार आंवला में सपा ने अपनी सीट गठबंधन में हुए समझौते के तहत बसपा को दे दी। अब बरेली से सप प्रत्याशी भगवतसरन गंगवार और आंवला से बसपा की रुचिवीरा मैदान में हैं। मतलब, बरेली में हाथी और आंवला में मतदाताओं को साइकिल चुनाव चिह्न देखने को नहीं मिलेगा।
बदायूं लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव 4 लाख 98 हजार 384 वोट लेकर सांसद बने थे। उस चुनाव में भले ही उनकी टक्कर भाजपा से हुई थी, मगर यहां से बसपा प्रत्याशी भी तीसरे नंबर पर रहा था। शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर 2014 में बसपा प्रत्याशी उम्मेद कश्यप भाजपा प्रत्याशी कृष्णाराज से 2.35 लाख वोटों से हारकर दूसरे नंबर पर रहे थे। यहां सपा प्रत्याशी मिथिलेश कुमार तीसरे स्थान पर चले गए थे। मगर, इस बार इस सीट पर साइकिल चुनाव चिह्न नहीं दिखेगा क्योंकि यह सीट सपा ने गठबंधन के समझौते में बसपा को दे दी है। पीलीभीत में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने सपा प्रत्याशी बुद्धसेन वर्मा 3 लाख 7 हजार 52 वोटों से हराया था। बुद्धसेन वर्मा को 2 लाख 39 हजार 882 वोट ही मिल पाए थे। बसपा प्रत्याशी अनीस अहमद फूल बाबू 1 लाख 96 हजार 294 वोट लेकर तीसरे नंबर पर थे। इस बार इस सीट पर चुनाव चिह्न हाथी गायब रहेगा।
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