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राशन माफिया थाने में और चावल भरा ट्रक भी 24 घंटे तक हाफिजगंज थाने में पूछताछ, मगर रिपोर्ट नहीं

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रिठौरा/हाफिजगंज। जिले भर में कुछ खास राशन माफिया पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) गोदामों से चावल और गेहूं उठकर इन माफियाओं के गोदामों में सीधे पहुंच जाता है। इसके बाद यह लोग इसे खुले बाजार में बेच देते हैं। यानी गरीबों का राशन मिलीभगत से बड़े लोगों की जेब में जा रहा है। मंगलवार देर शाम एक पुलिस अफसर ने सरकारी चावल से लदा ट्रक पकड़कर हाफिजगंज थाना पुलिस के हवाले कर दिया। दो दिन बीतने पर भी पुलिस ने पकड़े गए माफि या और सरकारी राशन को लेकर कोई कार्रवाई करना उचित नहीं समझा है। बताया जाता है कि इसके बदले 30 लाख रुपये में देर रात तक सौदेबाजी की बात चलती रही।
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भुता, नवाबगंज, फरीदपुर, आंवला, मीरगंज और बहेड़ी तहसीलों में बड़े पैमाने पर सरकारी राशन की कालाबाजारी अरसे से हो रही है। रिठौरा और नवाबगंज इस खेल में सबसे आगे हैं। एसपी देहात सतीश कुमार ने मंगलवार देर शाम रिठौरा-भंडसर मार्ग पर एक निजी आढ़त/गोदाम परिसर में सरकारी चावल की रीपैकिंग होते पकड़ी। यहां एक मिनी ट्रक में चावल के 60-65 किलो वजन के कट्टे लदे मिले। एसपी देहात ने मौके से राशन माफिया को भी रंगेहाथ पकड़ लिया। उन्होंने राशन माफिया और ट्रक को हाफिजगंज थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इसी बीच उनका तबादला हो गया। बस फिर क्या था, हाफिजगंज थाना पुलिस की मौज हो गई। माफिया से सौदेबाजी शुरू हो गई। सूत्र बताते हैं कि पकड़ा गया राशन माफिया अन्य कई धंधों में भी लिप्त है। उसकी साठगांठ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भुता, नवाबगंज, फरीदपुर और आसपास के सरकारी गोदामों से रात के अंधेरे में चावल और गेहूं उसके ठिकाने पर पहुंच जाता है। उसकी मदद के लिए बड़े नेता और अफसर हमेशा तत्पर रहते हैं।
बुधवार देर रात तक हाफिजगंज थाने में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। पुलिस ने खाद्य विभाग के अफसरों को सूचित किया। पूछा कि पकड़ा गया चावल, सरकारी है या नहीं? चेक करने पूर्ति निरीक्षक कुमार सौरभ आदि गए लेकिन चावल दूसरे कट्टों में भर देने से सरकारी चावल होने की पुष्टि नहीं हो सकी। इसकी आड़ में अब पुलिस खेल करने में जुटी है। बताते हैं कि दलालों के माध्यम से सौदा 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है। पुलिस ने मंडी समिति से ये जानकारी नहीं ली है कि राशन माफिया ने कहां से यह चावल और अन्य खाद्यान्न खरीदा। उसने टैक्स जमा किया या नहीं?
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