बरेली। बदायूं रोड पर रामेश्वरमधाम कॉलोनी में रह रहे नेवी से रिटायर्ड लक्ष्मण कुमार को आखिर बगैर घूस दिए ही बिजली कनेक्शन मिल गया। रविवार को छुट्टी के दिन फौजी के घर अचानक पहुंचे लाइनमैन ने मीटर लगाकर खंभे से केबल जोड़ी तो वह खुद भी आश्चर्यचकित रह गए। यहां तक कि लाइनमैन ने उनसे बिजली कनेक्शन का निर्धारित शुल्क भी नहीं मांगा। इससे पहले इलाके का जूनियर इंजीनियर ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद तीन महीने से फौजी को चक्कर कटवा रहा था। डीएम से लेकर सीएम तक शिकायत का भी कोई नतीजा नहीं निकला। छह मई को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मामला जब पॉवर कॉरपोरेशन के एमडी तक पहुंचा तो विभागीय अफसरों ने भी इसका संज्ञान लिया।
रामेश्वरमधाम कॉलोनी में तमाम घरों में पहले से बिजली के कनेक्शन हैं, लेकिन इसके बावजूद हाल ही में कॉलोनी में घर बनाकर उसमें बसे नेवी के रिटायर्ड अफसर लक्ष्मण कुमार ने बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया तो इलाके के जेई अजय कुमार यादव ने कॉलोनी को नॉन कवर्ड एरिया बताकर कनेक्शन देने से इंकार कर दिया। इसके बाद फरवरी से ही लक्ष्मण कुमार कनेक्शन के लिए भागदौड़ कर रहे थे। तमाम चक्कर लगाने के बावजूद जेई ने कनेक्शन नहीं दिया तो लक्ष्मण कुमार ने घूस मांगने का आरोप लगाते हुए नीचे से ऊपर तक शिकायतें की, लेकिन उनका भी कोई नतीजा नहीं निकला। लक्ष्मण कुमार के मुताबिक कनेक्शन के लिए उन्होंने विभागीय उच्चाधिकारियों के चक्कर लगाए, सीएम पोर्टल के अलावा डीएम से भी शिकायत की जिन पर आदेश-निर्देश भी इधर से उधर हुए, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं मिला। की अर्जी मंजूर नहीं करा सका।
बिजली विभाग के रवैये से बुरी तरह व्यथित फौजी की परेशानी की खबर अमर उजाला ने 6 मई को ‘देशवासियों! बिजली कनेक्शन के लिए ये फौजी घूस दे या न दे’ शीर्षक से छापी तो मामला ऊपर तक पहुंचा। आनन-फानन में फौजी के आवेदन की फाइल निकालकर सप्ताह भर के अंदर सारी औपचारिकता पूरी की गईं और रविवार को छुट्टी वाले दिन उनके घर पर कनेक्शन लगा दिया। कनेक्शन लगने के बाद फौजी लक्ष्मण ने फोन करके अमर उजाला को शुक्रिया कहा।
.. मगर बाकी अवैध कॉलोनियों में चलता रहेगा ‘खेल’
बिजली विभाग ने फौजी को तो कनेक्शन तो दे दिया है लेकिन उसके रवैये पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। बता दें कि शहर में बनीं 350 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां में बिजली विभाग की ओर से तमाम वैध कनेक्शन दिए गए हैं। प्रत्येक कनेक्शन पर 12 से 15 हजार रुपये तक की वसूली की जाती है। सूत्रों के मुताबिक यह पुराना खेल खुलने के डर से ही बिजली विभाग ने फौजी को कनेक्शन दिया, लेकिन इसके बाद भी यह सवाल अपनी जगह कायम है कि बाकी अवैध कॉलोनियों में लोगों को कैसे बिजली कनेक्शन मिल पाएंगे।