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हर जगह शोक, विवि में नृत्य का मजा

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बरेली। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद जवानों के लिए पूरे देश में आक्रोश हैं। लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजाने की मांग रहे हैं तो कुछ नम आंखों से शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद शहीदों की याद को पीछे करते हुए लोग अपने नाच गानों के कार्यक्रमों में व्यस्त रहे। हालांकि कुछ लोगों ने अपने कार्यक्रम स्थगित कर लिए। एमजेपी विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह के तहत शनिवार शाम को रंगारंग कार्यक्रम हुए। कैंपस से लेकर सोशल मीडिया पर इसकी जमकर खिंचाई हुई। इतना ही नहीं एक शुक्रवार को हुए भोज कार्यक्रम भी की काफी आलोचना हो रही हैं।
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विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के मौके पर गीत संगीत का कार्यक्रम हुआ। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से विभिन्न प्रदेशों के कल्चर को उभारा। शाम को बड़ी धूमधाम से कार्यक्रम मनाया गया। हालांकि कोई आलोचना न करें इसलिए कुछ प्रस्तुतियां देश भक्ति से जुड़ी प्रस्तुत की गईं। छात्राओं ने झांसी की रानी के जीवन को नोटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया। कर्मचारियों ने भी इस कार्यक्रम की आलोचना की। कहा कि देश में ऐसी घटना हुई, उसे देखते हुए नाच गाने के कार्यक्रम नहीं होने चाहिए था।

हमने खुद को मारकर बदन का जिंदा रखा
बरेली। विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के उपलब्ध पर शब्द संध्या का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने पुलवामा में हुई आतंकी हमले में शहीद जवानों को अपनी कविताएं समर्पित कीं। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने किया। कवि सचिन अग्रवाल लाइन पढ़ी- दूर कहीं वीराने में इक चमन को जिंदा रक्खा है, हमने खुद को मार दिया पर बदन को जिंदा रक्खा है, बिस्मिल और आजाद के जैसे कर्मठ वीर जवानों ने अपनी सांसे देकर के इस वतन को जिंदा रक्खा है। जय कुमार रुसवा ने कहा- हमने तो देखा नहीं इससे बड़ा मजाक, हर हरकत नापाक पर मुल्क कहाता पाक, सेना के बंधन सभी जो दिल्ली दे खोल, बदलेगा दो रोज में भारत का भूगोल। इसी तरह मंजू गोविंद, सिद्धार्थ मिश्रा, राहुल अवस्थी आदि ने भी शहीदों को समर्पित अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।
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