बरेली। भूमध्य सागर से उठे पश्चिमी विक्षोभ का उत्तरी भारत में तीन दिन असर रहा। हालांकि यह मैदानी इलाकों में कमजोर पड़ गया था। अब पश्चिमी विक्षोभ पलायन कर गया है। उत्तराखंड के पहाड़ों पर बर्फबारी थम गई है, लेकिन अभी हिमाचल और जम्मू कश्मीर में बर्फबारी जारी है। पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने से मैदानी इलाकों में सोमवार से आसमान साफ रहेगा। हालांकि सुबह से दोपहर तक बादल रह सकते हैं। सोमवार के बाद हवा में नमी की मात्रा बढ़ेगी। इसके साथ कोहरे और शीतलहर के प्रकोप में भी बढ़ोत्तरी होगी। मकर संक्रांति या उसके बाद तक मध्यम और घना कोहरा छाया रहेगा।
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी के अनुरूप रविवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। कुतुबखाना, पुराना शहर समेत कुछ स्थानों पर सुबह हल्की बूंदाबांदी भी हुई। थोड़ी देर बाद धूप निकली, लेकिन उसकी तीव्रता बहुत कम थी। दोपहर बाद भी कई बार हल्की बारिश के आसार बनें, लेकिन दो-चार बूंदे ही पड़ीं। देर शाम को ठीक ठाक बारिश हुई। इससे ठंड का प्रकोप कुछ कम हो गया। सोमवार को न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से दो डिग्री कम था। अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया, जो कि सामान्य था। मौसम वैज्ञानिक डा. एचएस कुशवाहा ने बताया कि उत्तराखंड में अब बर्फबारी एक तरह से थम गई है। इसके चलते बरेली समेत आस-पास के मैदानी इलाकों में सोमवार को सुबह से दोपहर तक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन आमतौर पर पूरे दिन आसमान साफ रहेगा। कोहरा भी हल्का ही पड़ेगा। मगर, हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से आने वाले दिनों में कोहरे और शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा। दिन में भी सूर्यदेव के दर्शन नहीं होंगे। मकर संक्रांति तक कभी मध्यम तो कभी घना कोहरे की धुंध आसमान में छाई रहेगी। इस दौरान न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी। यह 4.0 डिग्री सेल्सियस या इससे नीचे जा सकता है।
गेहूं छोड़कर सभी फसलों पर पड़ेगा असर
कृषि एवं सब्जी विशेषज्ञ डा. रनजीत सिंह का कहना है कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह से जनवरी के पहले सप्ताह के बीच में अधिकतम तापमान 13 और न्यूनतम 4.0 से 6.0 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है। ऐसे में रबी फसलों में गेहूं को छोड़कर बाकी सभी फसलों पर इसका असर पड़ेगा। गेहूं के लिए यह तापमान फायदेमंद है क्योंकि यह अभी बढ़वार पर है। किसान बुवाई के 21 से 25 दिन के अंतराल में गेहूं के खेत में पानी लगाएं। गील हटने पर 40 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से यूरिया की टाप ड्रेसिंग करें। 30 से 35 दिन बाद खरपतवार नाशक का स्प्रे करें। गेहूं में दूसरी सिंचाई 40 से 45 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार आसमान में लगातार बादल छाए रहने पर और दिन व रात के तापमान में भारी अंतर होने पर गेहूं में गेहूं में पीला गेरूआ रोग लग सकता है।
आलू में लग सकता है झुलसा
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार न्यूनतम तापमान और लगातार कोहरा पड़ने से आलू में झुलसा रोग लग सकता है। किसान इसका तुरंत उपचार करें। अगर दिक्कत आए तो कृषि विज्ञान पहुंचकर या अन्य किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। सरसों में कोहरे और कम तापमान की वजह से फलियां कम बनेंगी और फल में दाना भरने में समस्या होती है। वैसे झुलसा से बचाव के लिए किसान डायईथेन एम 45 का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अन्य सब्जियों में भी कोहरा और ठंड के असर से बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करने के बाद सही कीटनाशक का स्प्रे करें।