बीडीए को अपने मकानों से फिर हटाना पड़ा कब्जा
19 अल्प आय वर्ग के मकानों पर फिर काबिज हो गए थे लोग
बरेली। बीडीए को अपने मकानों पर 20 साल पहले अवैध तरीके से काबिज लोगों को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट और पुलिस की मदद से दोबारा हटवाना पड़ा। एक बार बीडीए ने पहले भी पुलिस की मदद से अपने मकान खाली कराए थे, लेकिन बीडीए की टीम के लौटते ही लोगों ने फिर मकानों पर कब्जा कर लिया। बीडीए ने कब्जेदारों को भी मकान खरीदने का प्रस्ताव दिया था।
बीडीए ने भाऊराव देवरस योजना में लगभग दो दशक पहले बिहारमान नगला में गरीबों के लिए ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान बनाए थे। जमीन विवाद के चलते मकानों के आवंटन से पहले यह मामला कोर्ट में चला गया। तब तक आसपास गांवों के लोग बीडीए के मकानों में परिवार समेत आकर रहने लगे। धीरे-धीरे इन लोगों ने बिजली और पानी के कनेक्शन लेकर मकानों पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। करीब छह महीना पहले बीडीए ने अवैध कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने या फिर कीमत जमा कर एलॉट कराने का ऑफर दिया। कब्जाधारकों ने जब बीडीए के नोटिस का जवाब नहीं दिया तो बीडीए ने पुलिस बल ले जाकर मकान खाली करा लिए, लेकिन बीडीए की टीम के लौटते ही यह कब्जेदार दोबारा आकर रहने लगे।
बुधवार को अतिरिक्त मजिस्ट्रेट और इज्जतनगर पुलिस की मदद से सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में बीडीए की टीम ने बिहारमान नगला पहुंचकर कब्जेदारों को हटाकर आवंटियों का ताला डलवा दिया। बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इसी तरह बीडीए की अन्य संपत्ति भी मजिस्ट्रेट और पुलिस की मदद से कब्जा मुक्त कराई जाएगी।