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दूसरे रोज भी छाई रहीं बकरीद की खुशियां

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बरेली।
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शहर में बकरीद की खुशियां दूसरे रोज भी छाई रहीं। लोगों का मिलना जुलना, गले मिलकर मुबारकबाद देना और मेहमान नवाजी का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। इस बीच बकरों की कुरबानी देकर ईद-उल-अजहा की रस्म भी पूरी करने में लोग लगे रहे।
बारिश की वजह से जहां पहले रोज बकरीद के जश्न को लोग खुलकर नहीं मना पाए थे उसकी कमी को उन्होंने रविवार को पूरा करने का प्रयास किया। रविवार होने के कारण दफ्तरों में काम करने वाले और शिक्षकों के लिए बकरीद का दूसरा दिन खास बन गया। वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए तो ये दिन दो गुना खुशियों का रहा। सुबह से ही बच्चे कुरबानी के लिए लाए गए बकरों आदि को लेकर खेलते और घूमते रहे। वहीं दोपहर तक कुरबानियों का सिलसिला भी चलता रहा। अलबत्ता, पहले दिन के मुकाबले कुरबानी बहुत कम रही।
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एक अनुमानित जानकारी के अनुसार जिले भर में लगभग 6 हजार बकरों और 17 सौ पड्डों की कुरबानी दी गई। इसमें शहर के बकरों की संख्या 2250 रही तो पड्डों की संख्या 800 रही। कुरबानी के बाद दिन भर हिस्से बांटने का सिलसिला चलता रहा। शाम को घरों में तरह-तरह के पकवान बने। दावतों और मेहमान नवाजी का दौर रात तक चला।
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मेलों में रही रौनक
बरेली। बकरीद के मौके पर लगे मेले दूसरे रोज भी जारी रहे। इन मेलों में पहले दिन के मुकाबले ज्यादा रौनक रही। इसके पीछे एक बड़ी वजह मौसम का साफ रहना तो दूसरा रविवार का होना रहा। मेलों में बच्चों ने खेल तमाशों का मजा लेने के साथ ही झूलों का भी आनंद लिया। खिलौने में तीर-तलवार और बंदूकों का बच्चों में खूब क्रेज रहा।
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