बरेली। सेना की जमीन का अधिग्रहण न हो पाने की वजह से लाल फाटक ओवरब्रिज की राह में अटका रोड़ा हट गया है। रक्षा संपदा विभाग ने प्रशासन के इस जमीन को 30 सालों के लिए लीज देने के आग्रह को मंजूर कर लिया है। प्रशासन को यह जमीन 30 सालों के लिए चार करोड़ रुपये के किराये पर दी जाएगी। लीज किराया मंजूर करने के बाद रक्षा संपदा विभाग ने सेना, कैंट और मिलिट्री फार्म के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर उनकी राय मांगी है। इसके बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।
लाल फाटक ओवरब्रिज के लिए सेना की जमीन के अधिग्रहण के मुद्दे पर दो सालों तक चली खींचतान के बाद अब हल निकल पाया है। रक्षा संपदा अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक लाल फाटक पर जमीन देने के लिए एनओसी मिलने में काफी वक्त लगने की संभावना थी लेकिन लीज पर जमीन लेने का निर्णय उपयुक्त है। अब ओवरब्रिज निर्माण के लिए जल्द जमीन मिल जाएगी। बता दें कि रक्षा संपदा विभाग की ओर से लीज पर मंजूरी के बाद अब अन्य प्रक्रिया तेजी से पूरी होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक करीब दो महीने के भीतर ही लीज के मामले में रक्षा मंत्रालय की भी अनुमति मिल जाएगी जिसके बाद यहां प्रशासन निर्माण शुरू करा सकता है।
बता दें कि रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार रक्षा भूमि का अधिग्रहण उसी कीमत की जमीन देने बाद ही किया जा सकता है। प्रशासन ने बभिया में सेना की जमीन लेने के बदले जो जमीन दिखाई थी, उसे सेना और कैंट बोर्ड ने लेने से इंकार कर दिया था। कैंट बोर्ड ने सैन्य क्षेत्र के नजदीक जमीन दिलाने को कहा था। प्रशासनिक अफसरों ने जमीन खोजने के तमाम प्रयास किए लेकिन असफल रहे। प्रशासन ने इसके बाद लीज पर जमीन लेकर निर्माण की योजना बनाई। प्राथमिक चरण में 30 वर्षों के लिए जमीन लीज पर देने के लिए रक्षा संपदा विभाग ने करीब चार करोड़ रुपये का किराया निर्धारित किया है। बता दें कि यह किराया स्टैंडर्ड टेबल ऑफ रेंट (एसटीआर) के तहत निर्धारित किया गया है।
प्रशासन ने जमीन लीज पर लेने के लिए पत्र लिखा है। करीब चार करोड़ रुपये के किराए पर लीज की मंजूर की गई है। जमीन सेना, कैंट और मिलिट्री फार्म की है। ऐसे में उनकी राय मांगी गई है। - प्रमोद कुमार सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी