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दबंगों का खौफ : समापन से पहले ही उजड़ गया चौबारी मेला

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बरेली। रामगंगा चौबारी मेेले के दुकानदारों को प्रशासन सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहा। इसकी वजह से शनिवार देर रात ही दूर-दराज से आए व्यापारियों ने अपनी दुकानें समेट लीं जबकि मेले का समापन 27 नवंबर की शाम को होना था। वहीं, दो मासूमों की मौत होने के बाद भी प्रशासन नहीं चेता। सोमवार तक बैरीकेडिंग लगाने का आदेश भी दरकिनार कर दिया गया। रविवार की दोपहर रामगंगा में सुरक्षित स्नान को लगाई बैरीकेडिंग हटा ली गई। इसके चलते श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर स्नान करते रहे।
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19 नवंबर को रामगंगा चौबारी मेले का शुभारंभ हुआ था और समापन 27 की शाम को होना था। मगर प्रशासन व्यापारियों को सुरक्षा, सहूलियत देने में पूरी तरह नाकाम रहा। ड्रैगन झूला के संचालक निजामुद्दीन शनिवार रात ही अपना झूला समेटने लगे थे। उन्होंने बताया कि दबंग गुटों में पहुंचकर मारपीट कर बगैर टिकट लिए ही घुस रहे थे। शिकायत की तो पुलिस ने उन्हें ही फटकार कर भगा दिया। वहीं, डांस पार्टी के संचालक ने बताया कि उनके कर्मचारी से मारपीट हुई। वह शिकायत लेकर पहुंचे लेेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे ही आरोप मनोज और उस्मान समेत अन्य दुकानदारों ने लगाते हुए आगामी मेले में न आने की बात कही।

घाट बना कूड़ेदान, होर्डिंग्स तक सिमटी स्वच्छता
मंच से रामगंगा ही स्वच्छता का राग अलापने वाली सामाजिक संस्थाएं भी घाट को स्वच्छ नहीं रख सकीं। रामगंगा के घाट पूजा सामग्री समेत दुकानों से निकले कचरे से पटे हैं। प्रशासनिक अधिकारी सब जानकर भी अनजान हैं। जबकि प्रशासन का आदेश था कि संस्थाएं लोगों को जागरूक करेंगी। फिर भी गंदगी होगी तो आंवला नगर पालिका के साथ साफ-सफाई में सहयोग करेंगी। मगर कुछ कैंप में इक्का दुक्का लोगों को छोड़कर रविवार को बाकी कैंप खाली पड़े रहे। स्वच्छता जागरूकता होर्डिंग्स तक सिमटी नजर आई।
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