रबी बुवाई से ठीक पहले सहकारी समितियों से यूरिया-डीएपी और एनपीके अचानक गायब हो गई है। हालांकि कृषि गोदाम यूरिया से भरे पड़े हैं। ग्रामीण इलाकों में कृत्रिम कमी का प्राइवेट दुकानदारों ने पूरा फायदा उठाते हुए खाद की कालाबाजारी शुरू कर दी है। किसानों को तय रेट से 10 से 15 प्रतिशत अधिक रेट पर यूरिया, डीएपी और एनपीके बेची जा रही है। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने डीएम से पूरे मामले की जांच कराने को कहा है।
जनपद में 142 साधन सहकारी समितियों से रबी और खरीफ सीजन में किसान खाद उठाते हैं। इस बार कृषि गोदामों पर यूरिया-डीएपी और एनपीके का पर्याप्त स्टाक हैं, लेकिन इनसे किसान खाद पर्याप्त मात्रा में नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि प्रत्येक ब्लॉक में एक ही कृषि गोदाम है। साधन सहकारी समितियों के सचिव एक नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते समितियोें पर ताला लगा है। छह उर्वरक कंपनियों से खाद सहकारी समितियों तक नहीं पहुंच पाई है। इफको की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भी गड़बड़ाने से डीएपी-यूरिया की सप्लाई बाधित है। यूरिया-डीएपी और एनपीके की कमी से किसान रबी सीजन में गेहूं और सरसों समेत अन्य फसलों की बुवाई लेट हो रही है। आंवला, बहेड़ी, नवाबगंज, बिथरी, फरीदपुर, भोजीपुरा, रामनगर, विशारतगंज, आलमपुर जाफराबाद समेत अधिकांश एरिया में सहकारी समितियों से खाद न मिलने से प्राइवेट दुकानदार तय रेट से अधिक दामों पर उर्वरक बेच रहे हैं। किसान 10 से 15 प्रतिशत अधिक दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हैं।
खाद स्टाक की स्थिति
सहकारी समितियों पर भेजी जाने वाली खाद
यूरिया 3078 मीट्रिक टन
डीएपी 1846 1631 मीट्रिक टन
एनपीके 3985 मीट्रिक टन
बफर में स्टाक (अतिरिक्त के तौर पर)
यूरिया- 3352 मीट्रिक टन
डीएपी 1131 मीट्रिक टन
एनपीके 651 मीट्रिक टन
वर्तमान में मौजूद कुल खाद का स्टाक
यूरिया 6430 मीट्रिक टन
डीएपी 2762 मीट्रिक टन
एनपीके 4636 मीट्रिक टन