रेशमा बी की उम्र अब 58 साल है। अखबार में तीन तलाक के बैन की खबर पढ़कर वह खुश है। उनका पूरा जीवन तीन तलाक के दंश से बिखर गया। रेशमा बी बताती हैं 29 साल पहले 1988 में शहजादा में रहने वाले अहमद अली से उनकी शादी हुई। एक साल बाद ही उन्होंने दूसरी शादी कर ली और घर आना बंद कर दिया। रेशमा बी अपनी बच्ची के साथ सास-ससुर के घर रहकर जीवन काटती रहीं। उम्मीद थी कि बेटी का मोह शौहर को एक दिन घर ले आएगा। इंतजार के साल बीतते गए, बेटी 16 साल की हो गई। वह बताती हैं कि सन 2003 में शौहर जब तब अपने वालिद से मिलने आते पर उनके साथ कोई रिश्ता नहीं रखा। एक रोज मौलाना को लेकर शौहर घर आए, उन्हें मेहमानखाने में बुलाया और तीन बार तलाक कहकर चले गए। रेशमा यह बताते हुए रुआंसी हो गईं, बोली वह बयां नहीं कर सकती कि वो पल उनके लिए कितना भारी था। तीन तलाक के बाद सास-ससुर ने उन्हें घर रखने से हाथ खड़े कर दिए। उन्हें बहेड़ी में रहने वाली बहन ने सहारा दिया। रेशमा बताती हैं कि मायके वालों के सहारे से उन्होंने बेटी को पढ़ाया और अब शादी भी कर चुकी हैं। उनकी तीस साल की बेटी शाजिया कहती हैं कि वे दुआ करती हैं कि उनकी अम्मी ने जो सहा, वह दुनिया की कोई औरत न सहे। वह तीन तलाक पर लगे बैन से बेहद खुश हैं।
यहां तो तलाक दिए बिना ही कर दिया बेघर
बरेली। मुन्नी (30) को तीन तलाक दिए बिना ही बेघर कर दिया गया। दातागंज की मुन्नी की शादी 14 साल की उम्र में आंवला के गांव खान पुरदयाल में रमेश से हुई। पति हापुड़ में रहकर शराब के ठेके पर काम करता था। वह अपने दो बेटे और दो बेटियों संग ससुराल में रहती थी। वह बताती हैं कि शादी के 12 साल बाद पति एक दिन दूसरी शादी करके घर आ गया। उसे बच्चों समेत घर से निकाल दिया। तब से वह भाई के घर रहकर किसी तरह गुजारा कर रही थी। दो साल पहले मुन्नी को उनके मामा बरेली ले आए, यहां वह पांच हजार रुपये में नौकरी करके बच्चों को पाल रही हैं। शहर आकर मुन्नी ने अपने न्याय के लिए लड़ाई शुरू की। उन्होंने आशा ज्योति केंद्र में शिकायत दर्ज कराई। यहां की काउंसलर सविता और कीर्ति आंवला जाकर रमेश से मिलीं। मुन्नी के ससुर और पति को केंद्र पर काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। पति ने दूसरी शादी करने की बात स्वीकारी। मुन्नी ने कहा कि अगर उसे घर खर्च दिया जाए तो वह कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। दबाव बना तो रमेश और उसे पिता ने मुन्नी के चार बच्चों में से सबसे बड़ी बेटी की जिम्मेदारी ली।