जनपद में करीब ढाई सौ से अधिक बैंकेट हॉल हैं। अप्रैल और मई माह में हर बैंकेट हॉल में औसतन बीस शादी होनी थीं। यानी रोजाना जिले में करीब पांच हजार शादियां होनी थीं। ये नहीं हो पाईं। इसका नुकसान बैंकेट हॉल और टेंट हाउस को उठाना पड़ा है। पहले शासन की गाइडलाइन में कहा गया कि एक शादी में सिर्फ 20-25 लोग ही शामिल हो सकते हैं। ऐसे में लोगों ने होटल में जाना ज्यादा बेहतर समझा। ऐसे में बैंकेट हॉल का काम ठप हो गया। एसोसिएशन के मुताबिक करीब सौ करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। - गोपेश अग्रवाल, अध्यक्ष, बैकेंट हाल व टेंट एसोसिएशन।
पिछले दो साल से बैंकेट हॉल नुकसान ही झेल रहे हैं। बिजली का खर्चा, कर्मियों का वेतन, सजावट में प्रयोग होने वाला सामान भी समय के साथ पुराना और खराब होता है। इन सभी खर्चों को हम वहन कर रहे हैं और शादियां हो नहीं रही हैं। अभी शासन लॉकडाउन खोल देगा तो 20 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं मिलेगी तो कोई भी बैंकेट हाल में नहीं आएगा। हमारी शासन से मांग है कि बैंकेट हाल में जगह के हिसाब से अनुमति दी जाए या फिर कम से कम दो सौ लोगों को शादी में शामिल होने की अनुमति दी जाए। हम सभी नियमों का पालन करेंगे। - ज्ञानेंद्र पटेल, मैफेयर लॉन।
दो साल से काम पूरी तरह टूट चुका है। कहीं कोई काम नहीं बचा है। हमारा तो सामान ही खराब हो रहा है और हमारे साथ जुड़े तमाम मजदूर भी रोजी रोटी के लिए परेशान हैं। कैटरर्स व्यवसाय को भी अप्रैल और मई माह में पूरे जिले में करीब पंद्रह करोड़ रुपये की चपत लगी है। - रजनीश गंगवार, कृष्णा कैटरर्स।
एक शादी से सिर्फ कैटरर्स या बैंकेट हॉल का व्यापार नहीं जुड़ा होता है। हमारे साथ कई राशन वाले, मजदूर वर्ग भी जुड़ा होता है। उन सभी का लंबा नुकसान हुआ है। कुछ कारीगर ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ भोजन बनाना या कोई स्पेशल पकवान बनाना आता है। इसके अलावा वे कुछ नहीं कर पाते हैं। अब वे सब बेकार बैठे हैं। ऐसे में सभी के सामने रोटी का संकट है। पिछले दो सालों में जो दिन देखने पड़े हैं, ऐसा पहले कभी नहीं देखा। - शरत बनर्जी, अरोमा कैटरर्स।