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अप्रैल, मई में मैरिज लॉन, कैटरर्स व्यवसाय को 115 करोड़ का नुकसान

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demo photo - फोटो : अमर उजाला
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जिले में करीब तीन सौ बैंकेट हाल, ढाई सौ से अधिक छोटी-बड़ी धर्मशालाएं

बरेली। कोरोना की दूसरी लहर में लगे लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। लॉकडाउन से पहले ही शादी समारोहों पर संकट खड़ा हो गया था। कई शादियां टल गईं तो कुछ मंदिरों में या घरों में ही 20 लोगों को शामिल कर हो गईं। पिछले लॉकडाउन से ही नुकसान झेल रहे मैरिज लॉन और कैटरर्स के व्यवसाय को इस बार के लॉकडाउन ने करीब 115 करोड़ का तगड़ा झटका दे दिया है।
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बैंकेट हॉल एंड टेंट एसोसिएशन का कहना है कि अप्रैल, मई में शादियां बैकेट हाल में नहीं हो सकीं। अधिक शादियां रद्द ही करनी पड़ीं। जिले में इससे करीब 100 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। वहीं कैटरर्स का कहना है कि उनका करीब 15 करोड़ का काम उनका प्रभावित हुआ है। उन्हें उम्मीद थी कि जून में लॉकडाउन खुल जाएगा तो इस माह कुछ काम कर सकेंगे, लेकिन बरेली में अगले पंद्रह दिनों तक लॉकडाउन खुलने की कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में यह माह भी इसी तरह निकल जाएगा और इसके बाद कोई सहालग नहीं है।

जनपद में करीब ढाई सौ से अधिक बैंकेट हॉल हैं। अप्रैल और मई माह में हर बैंकेट हॉल में औसतन बीस शादी होनी थीं। यानी रोजाना जिले में करीब पांच हजार शादियां होनी थीं। ये नहीं हो पाईं। इसका नुकसान बैंकेट हॉल और टेंट हाउस को उठाना पड़ा है। पहले शासन की गाइडलाइन में कहा गया कि एक शादी में सिर्फ 20-25 लोग ही शामिल हो सकते हैं। ऐसे में लोगों ने होटल में जाना ज्यादा बेहतर समझा। ऐसे में बैंकेट हॉल का काम ठप हो गया। एसोसिएशन के मुताबिक करीब सौ करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। - गोपेश अग्रवाल, अध्यक्ष, बैकेंट हाल व टेंट एसोसिएशन।

पिछले दो साल से बैंकेट हॉल नुकसान ही झेल रहे हैं। बिजली का खर्चा, कर्मियों का वेतन, सजावट में प्रयोग होने वाला सामान भी समय के साथ पुराना और खराब होता है। इन सभी खर्चों को हम वहन कर रहे हैं और शादियां हो नहीं रही हैं। अभी शासन लॉकडाउन खोल देगा तो 20 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं मिलेगी तो कोई भी बैंकेट हाल में नहीं आएगा। हमारी शासन से मांग है कि बैंकेट हाल में जगह के हिसाब से अनुमति दी जाए या फिर कम से कम दो सौ लोगों को शादी में शामिल होने की अनुमति दी जाए। हम सभी नियमों का पालन करेंगे। - ज्ञानेंद्र पटेल, मैफेयर लॉन।

दो साल से काम पूरी तरह टूट चुका है। कहीं कोई काम नहीं बचा है। हमारा तो सामान ही खराब हो रहा है और हमारे साथ जुड़े तमाम मजदूर भी रोजी रोटी के लिए परेशान हैं। कैटरर्स व्यवसाय को भी अप्रैल और मई माह में पूरे जिले में करीब पंद्रह करोड़ रुपये की चपत लगी है। - रजनीश गंगवार, कृष्णा कैटरर्स।

एक शादी से सिर्फ कैटरर्स या बैंकेट हॉल का व्यापार नहीं जुड़ा होता है। हमारे साथ कई राशन वाले, मजदूर वर्ग भी जुड़ा होता है। उन सभी का लंबा नुकसान हुआ है। कुछ कारीगर ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ भोजन बनाना या कोई स्पेशल पकवान बनाना आता है। इसके अलावा वे कुछ नहीं कर पाते हैं। अब वे सब बेकार बैठे हैं। ऐसे में सभी के सामने रोटी का संकट है। पिछले दो सालों में जो दिन देखने पड़े हैं, ऐसा पहले कभी नहीं देखा। - शरत बनर्जी, अरोमा कैटरर्स।

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