बरेली। लोकसभा चुनाव में बहाना बनाकर मतदान केंद्रों से नदारद रहने और चुनाव ड्यूटी न करने वाले अफसर और कर्मचारियों पर गाज गिराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सीडीओ ने 23 अप्रैल को पोलिंग पार्टियों के साथ रवाना न होने और मतदान केंद्रों पर अनुपस्थित 560 मतदान अधिकारियों और पीठासीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अनुपस्थित रहने वाले मतदान और पीठासीन अधिकारियों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उन पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बरेली और आंवला लोकसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ था। इसमें 17 हजार अफसर और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। 1500 कर्मचारियों को रिजर्व पार्टी के तौर पर रखा गया था। चुनाव ड्यूटी से पहले प्रत्येक मतदान और पीठासीन अधिकारियों को दो चरणों में मतदान कराने का प्रशिक्षण भी दिया गया। पहले तो प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में कर्मचारी अनुपस्थित रहे। उसके बाद जब पोलिंग पार्टियां रवाना हुईं तो उसमें 560 से ज्यादा अफसर और कर्मचारी साथ में मतदान केंद्रों तक नहीं गए। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि रजिस्टर में उनकी हाजिरी नहीं लग पाई, लेकिन वह मतदान केंद्रों तक गए और ड्यूटी भी की। लेकिन उनके नाम भी गैर हाजिर रहने वालों में दिखाकर नोटिस जारी कर दिया गया है। फिलहाल, अनुपस्थित कर्मियों से कहा गया है कि वह एक सप्ताह के अंदर स्पष्टीकरण दे दें। अन्यथा उन पर एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
‘लोकसभा चुनाव में बिना किसी वजह से गैर हाजिर रहना चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। ऐसे 560 कर्मचारी चिह्नित किए गए हैं, जो मतदान केंद्रों पर अनुपस्थित रहे और चुनाव प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश की। नोटिस भेजकर ऐसे कर्मियों से सप्ताह भर में स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने की स्थिति में उन पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।’
- सत्येंद्र कुमार, सीडीओ