बरेली। आमतौर पर ऐसा होता नहीं है, लेकिन जब आसनसोल की माधवी मंडल को ट्रेन में रह गया एक लाख से ज्यादा कीमत की ज्वैलरी, तीस हजार कैश और हजारों रुपये कीमत की आस्ट्रेलियन करेंसी से भरा उनका बैग जीआरपी ने उन्हें बुलाकर उनके सुपुर्द किया तो वह अपनी खुशी को बयां करना उनके लिए मुश्किल हो गया। जीआरपी के स्टाफ को लाख-लाख धन्यवाद देती हुईं लौट गईं।
माधवी मंडल और उनके पति वीरेंद्र बृहस्पतिवार को अकाल तख्त एक्सप्रेस से आसनसोल से लखनऊ आ रहे थे। उनका ट्रेन के रिजर्वेशन ए-वन कोच में था। ट्रेन रात पौने तीन बजे चारबाग स्टेशन पहुंची तो उन्होंने ट्रेन से बाकी सारा सामान तो उतार लिया लेकिन उनका एक बैग कोच में ही रह गया। कुछ देर बाद जब उन्हें अहसास हुआ कि एक बैग ट्रेन में रह गया है तो फौरन वह प्लेटफार्म पर पहुंची लेकिन तब तक ट्रेन जा चुकी थी। माधवी ने ट्रेन में बैग रह जाने की स्टेशन मास्टर को सूचना तो दी, लेकिन यह उम्मीद छोड़ दी कि बैग उन्हें वापस मिल पाएगा।
बहरहाल स्टेशन मास्टर ने रेलवे कंट्रोल मुरादाबाद को मेसेज दिया, जिसके बाद सुबह सवा छह बजे ट्रेन जंक्शन पहुंची तो जीआरपी के सब इंस्पेक्टर अशोक कुमार और कांस्टेबल नईम ने कोच में छानबीन की। बैग कोच में ही मिल गया। खोलकर देखा तो उसमें सोने का कड़ा, टॉप्स, तीस हजार रुपये कैश, आस्ट्रेलियन नोटों समेत कुछ और सामान था। इसके बाद इंस्पेक्टर कृष्ण अवतार ने लखनऊ स्टेशन मास्टर को बैग मिलने की सूचना दी। शाम को माधवी पति के साथ जंक्शन पहुंची और बैग रिसीव कर लिया।