बरेली। अवैध मकान या दुकानें आचार संहिता की आड़ में लगातार बन रहे हैं, मगर बीडीए के इंजीनियर जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। तय प्लानिंग के तहत अवैध निर्माण पहले सील कराए जाते हैं। फिर उन पर एफआईआर होती है। उसके बाद अवैध निर्माण सील तोड़कर लगातार चलते रहते हैं। जब निर्माण पूरा हो जाता है तो एई और जेई अपनी भूमिका से भी साफ बच जाते हैं। इज्जतनगर थाना क्षेत्र में बीडीए जेई ने दो अवैध निर्माणकर्ताओं पर सील तोड़कर निर्माण कराने में एफआईआर दर्ज कराई है। यह निर्माण चार महीने पहले सील किए गए थे।
बीडीए जेई वीरेंद्र सिंह ने इज्जतनगर क्षेत्र की आशापुरम कालोनी निवासी प्रखर सक्सेना और तुलाशेरपुर निवासी संबंधी वीरभान गुप्ता और मोहित गुप्ता के खिलाफ बृहस्पतिवार देर रात रिपोर्ट दर्ज कराई। अवर अभियंता का कहना था कि 20 नवंबर 2018 को उनको अवैध निर्माण की सूचना मिली थी। तबसे उनको निगरानी के लिए उच्चाधिकारियों से आदेश मिले। प्रखर सक्सेना आशापुरम कालोनी में चार खंभा के पास बिना विकास प्राधिकरण की अनुमति के अवैध निर्माण करा रहे थे। जिसके चलते बीते वर्ष 20 नवंबर को कार्रवाई की थी। मगर, निर्माण लगातार होता रहा। तब 28 जनवरी को भवन सील कर दिया गया था। यानी कि बीडीए के जेई को 20 नवंबर 2018 से 28 जनवरी 2019 तक यानी 70 दिन बाद निर्माण सील करने की फुर्सत मिली। तब तक अधिकांश निर्माण पूरा हो गया। उसमें भी जो बचा खुचा रह गया, वह जनवरी से मार्च तक पूरा हो चुका है। तब जाकर एफआईआर दर्ज कराई गई। दूसरे मामले में भी बीडीए ने यही किया। वीरभान गुप्ता और मोहित गुप्ता का तुलाशेरपुर में अवैध निर्माण इंजीनियरों को 17 दिसंबर को पता चला। मगर, भवन सील करने के लिए मालिक को एक सप्ताह के बजाय 15 दिन का नोटिस देकर निर्माण पूरा कराने की छूट जानबूझकर दी गई। दो जनवरी को भवन सील कर दिया गया। इसके बाद जेई 12 मार्च को मौके पर देखने गए कि निर्माण हो रहा है या नहीं। मतलब, 65 दिन से ज्यादा का वक्त भवन मालिक को अपना अवैध निर्माण पूरा करने के लिए बीडीए की ओर से दे दिया गया। 12 मार्च को जेई को सील टूटी मिली और निर्माण कार्य चल रहा था। तब भी बीडीए जेई ने भवन मालिक पर एफआईआर दर्ज नहीं कराई। जेई ने 23 मार्च को दोबारा निरीक्षण करने की खानापूरी की। फिर बमुश्किल 29 मार्च को एफआईआर दर्ज हो सकी।