बरेली। किसान खरीफ की फसल अच्छी होने से खुशहाल हैं लेकिन चीनी मिलों ने गन्ना किसानों की दिवाली काली कर दी। नया पेराई सत्र शुरू करने से पहले गन्ना किसानों का पुराना बकाया भुगतान नहीं हो सका। तर्क यह कि मार्केट में चीनी की कीमतें काफी कम हैं। बैंकों से साफ्ट लोन लेने की प्रक्रिया बताकर किसानों का पुराना बकाया एक बार फिर लटक गया। सरकार का 14 दिन में गन्ना भुगतान का दावा भी खोखला साबित हो रहा है।
बरेली मंडल की निजी क्षेत्र की 11 चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का अब भी लगभग 800 करोड़ से अधिक का बकाया है। नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले किसानों का बकाया शत प्रतिशत मिलने की उम्मीद थी क्योंकि सरकार ने इसके लिए प्रदेश भर की चीनी मिलों को 4000 करोड़ का साफ्ट लोन भी दे रखा है। सहकारी चीनी मिलों को सरकार ने 292 करोड़ से ज्यादा की आर्थिक मदद भी दी है, इसके चलने इन मिलों का अधिकांश बकाया दिया जा चुका है। मगर, निजी क्षेत्र की मिलों ने दिवाली से पहले गन्ने का पुराना बकाया नहीं चुकाया। किसानों का बिना बकाया चुकाए बहेड़ी चीनी मिल 29 अक्तूबर को पेराई सत्र शुरू कर चुकी है। बरेली में फरीदपुर की द्वारिकेश शुगर मिल ने 12 नवंबर, सेमीखेड़ा ने नौ, ओसवाल शुगर मिल नवाबगंज ने 14, मीरगंज शुगर मिल ने 12, पीलीभीत की एलएच नीची मिल 11 नवंबर, बरखेड़ा, बजाज शुगर इंडस्ट्री मकसूदापुर और बजाज शुगर इंडस्ट्री निगोही, रोजा शुगर मिल ने 10 और सहकारी चीनी मिल पुवायां (शाहजहांपुर) ने पेराई शुरू करने की सूचना गन्ना विभाग को दे दी है। बदायूं की दो चीनी मिलों ने 15 नवंबर के बाद पेराई सत्र शुरू करने की बात कही है।
दिवाली से पहले फरीदपुर, मीरगंज, रोजा शुगर और बजाज शुगर निगोही ने किसानों को कुछ बकाया भुगतान किया गया है, ताकि गन्ना किसान दिवाली ठीक से मना सकें। मिलों को साफ्ट लोन देने की प्रक्रिया चल रही है। 30 नवंबर तक पुराना बकाया भुगतान हो जाएगा। सत्येंद्र सिंह, उपायुक्त गन्ना, बरेली मंडल