अंतर विश्वविद्यालयीय खेलों में टीम न ले जाने पर कॉलेज होंगे डिबार
- खेलों के साथ खिलवाड़ करने वाले कॉलेजों पर कसा जाएगा शिकंजा
- 24 अगस्त को विवि में होने वाली क्रीड़ा परिषद की बैठक रखा जाएगा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। खेलों के साथ खिलवाड़ करने वाले कॉलेजों पर विश्वविद्यालय अब शिकंजा कसने की तैयारी में है। जो कॉलेज अपने यहां प्रतियोगिता कराएगा उसे अंतर विश्वविद्यालयीय टूर्नामेंट में टीम लेकर जाना ही होगा। अगर कॉलेज टीम ले जाने से इंकार करता है तो उसे डिबार किया जाएगा। 24 अगस्त को बुलाई गई क्रीड़ा परिषद की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा।
पिछले साल शतरंज, वॉलीबाल समेत कई खेलों की टीमें ले जाने के लिए कॉलेज तैयार नहीं हुए। शतरंज की अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिता बदायूं के एक कॉलेज ने कराई थी, लेकिन उसने अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिता में टीम ले जाने से इंकार कर दिया, जबकि विश्वविद्यालय पहले से ही नियम लागू कर चुका है कि आयोजन सचिव ही टीम लेकर नॉर्थ जोन के टूर्नामेंट में जाएंगे। अगर कॉलेज इंकार करता तो उसे डिबार किया जाएगा। एआईयू ने भी निर्देश जारी किए हैं कि विश्वविद्यालयों के खेलों में सभी कॉलेज हिस्सा लें। इसके लिए भी एक प्रस्ताव पास किया जाएगा कि कॉलेज सभी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करें। कॉलेजों को हर खेल की रिपोर्ट भी अनिवार्य रूप से देनी होगी। एआईयू ने इस बार कुछ और खेल अपनी सूची में शामिल किए हैं, इन पर भी विचार किया जाएगा। इसमें रस्साकशी, ब्रिज कराटे जैसे खेल शामिल हैं। क्रीड़ा सचिव प्रोफेसर एके जेटली ने बताया कि 24 अगस्त को बैठक बुलाई गई है। इसमें ये सारे प्रस्ताव रखे जाएंगे। आयोजक कॉलेज टीम ले जाने की अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। अगर कॉलेज ऐसा करते हैं तो उनको डिबार करने का प्रस्ताव पास किया जाएगा।