राजकीय कॉलेजों को वाईफाई सेवा से लेेस करने और छात्रों को ई-लाइब्रेरी की सुविधा प्रदान करने की पिछले साल शासन ने पहल की थी। उपकरण और अन्य सुविधाएं भी तुरंत उपलब्ध कराईं पर कुछ कॉलेजों को छोड़ दें तो अधिकतर कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी की सुविधा शुरू नहीं हो सकी, जिसके चलते लाखों रुपये के उपकरण धूल फांक रहे हैं। अब शासन ने उच्च शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की है कि कितने कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी और वाईफाई सुविधा है।
शासन ने पिछले साल सूबे के 256 राजकीय कॉलेजों को योजना के तहत चुना था, जिसके तहत कॉलेजों को वाईफाई युक्त किया जाना था और ई-लाइब्रेरी की शुरुआत होनी थी। रुहेलखंड परिक्षेत्र में 22 कॉलेज चुने गए थे। यूपी डेस्को के माध्यम से इन कॉलेजों को उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। बीसलपुर राजकीय कॉलेज समेत तीन राजकीय कॉलेजों में वाईफाई और ई-लाइब्रेरी की सुविधा शुरू हो गई। बाकी कॉलेजों में योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। कॉलेज के जिम्मेदार लोगों का कहना था कि इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने के कारण दिक्कत हो रही है। नतीजतन जो उपकरण कॉलेजों को दिए गए थे वो धूल फांक रहे हैं। अब शासन ने इन कॉलेजों की रिपोर्र्ट तलब की है कि योजना किस हाल में है। दूसरी तरफ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का कहना है कि कुछ कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी शुरू नहीं हो सकी। जुलाई से उनमें भी शुरू करा दी जाएगी।
पिछले साल रुहेलखंड परिक्षेत्र के 22 कॉलेज वाई-फाई और ई-लाइब्रेरी के लिए चुने गए थे। कनेक्टिविटी न होने के कारण कुछ कॉलेजों में यह शुरू नहीं पाया है। इस सेशन से कोशिश करेंगे कि सभी राजकीय कॉलेजों में ई-लाइब्रेरी शुरू हो जाए।
-डॉ. आरपी यादव, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी