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पिछले सात वर्षों में गेहं खरीद का सबसे खराब प्रदर्शन

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बाराबंकी। खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री के जिले में गेहूं की खरीद का हाल बेहाल है। देखा जाए तो पिछले सात वर्षों में गेहूं खरीद का ये सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। समर्थन मूल्य से ज्यादा बाजार भाव तो रहा ही प्रभारियों ने भी खरीद में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसका नतीजा यह रहा है कि जिले में लक्ष्य के सापेक्ष दो प्रतिशत भी गेहूं खरीद नहीं की जा सकी है। जबकि गेहूं खरीद बंद होने में महज एक सप्ताह ही शेष बचा है। ऐसे में अब केंद्र प्रभारी भी खरीद के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
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शासन ने इस वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 हजार एमटी निर्धारित किया था। इसके लिए जिलेभर में 63 गेहूूं खरीद केंद्र खोले गए। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक महज 1543 एमटी ही गेहूं खरीद की जा सकी है जो निर्धारित लक्ष्य से दो प्रतिशत से भी कम है। राज्यमंत्री के जिले में गेहूं खरीद का प्रदर्शन इतना खराब होगा ये किसी को उम्मीद नहीं थी। पिछले सात वर्षों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस साल सबसे कम खरीद हुई है। कम खरीद होने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि समर्थन मूल्य से ज्यादा बाजार भाव रहा।
इसी वजह से किसान गेहूं लेकर क्रय केंद्रों पर लेकर नहीं आए। इसके चलते गेहूं की खरीद नहीं हुई। वहीं गेेहूं की खरीद न होने पर शासन ने गांवों में जाकर किसानों से सीधे गेहूं खरीद का आदेश जारी किया लेकिन केंद्र प्रभारियों ने गेहूं खरीद में जरा भी रुचि नहीं दिखाई। सूत्रों का कहना है कि यदि केंद्र प्रभारियों के साथ ही जिम्मेदारों ने जरा भी प्रयास किया होता और गेहूं की खरीद में रुचि दिखाई होती तो जिले में गेहूं खरीद का प्रदर्शन इतना खराब न होता।
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वर्ष लक्ष्य गेहूं की खरीद (मीट्रिक टन में)
2016-17 103500 8876
2017-18 134500 72276
2018-19 95000 102329
2019-20 101500 52081
2020-21 101500 36259
2021-22 101500 73362
2022-23 78000 1543
गेहूं खरीद का लक्ष्य हासिल करने का पूरा प्रयास किया गया लेकिन इस बार बाजार भाव समर्थन मूल्य से कहीं ज्यादा रहा। यहीं कारण रहा कि किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर नहीं आए जबकि इसके लिए तमाम प्रयास किए गए और गांवों में जाकर किसानों से संपर्क भी किया गया। गेहूं खरीद में केंद्र प्रभारियों ने बराबर सहयोग किया और इसके लिए अभी भी किसानों से संपर्क किया जा रहा है।
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-रमेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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