घाघरा नदी में आई बाढ़ का तांडव थमने का नाम नही ले रहा है। एल्गिन चरसड़ी का तटबंध का 50 मीटर हिस्सा नदी में समा जाने के बाद जिले के आठ गांव के सामने अस्तित्व का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ के पानी में दो व्यक्ति की सुबह डूब कर मौत हो गई। तो एक अन्य वृद्व की सर्पदंश से जान चली गई।
हालात बेकाबू हो जाने के बाद प्रशासन की तेजी भी बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने में सफल नही हो पा रही है। गृहस्थी का सामान बटोर कर किसी तरह लोग जान बचाकर बाहर निकल रहे हैं। एक बटालियन फ्लड पीएसी यहां पहुंच कर राहत बचाव कार्य में जुट गई है। डीएम अखिलेश तिवारी, एसपी अनिल कुकमार सिंह बाढ़ पीड़ित इलाकों में पहुंच कर राहत कार्यो का जायजा लिया।
जिले के रामनगर, सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के दो सौ गांव में घाघरा नदी का तांडव की चपेट में है। करीब एक माह से नेेपाल से छोड़े जा रहे पानी से मंगलवार की भोर एल्गिन चरसड़ी तटबंध कटने से बांसगांव, ढेमा, असुवा, पिपरी, मल्लाहनपुरवा, सिकरी जीवल, कितुली, खजूरी गांवों का अस्तित्व संकट में फंस गया है। यहां के करीब दस हजार आबादी को तटबंधों राहत शिविरों में किसी तरह पहुंचाया जा रहा है।
हालात बेकाबू हो जाने से दो सौ गांव में तबाही से बचाने के लिए एक बटालिय फ्लड पीएसी बुला ली गई है। कई गांवों से संपर्क टूट हुआ है। गुरुवार को मल्लाहनपुरवा के हरिश्चंद्र (55) की डूब कर मौत हो गई। इसी तरह सूरतगंज क्षेत्र के बैरानामऊ मंझारी गांव में 35 वर्षीय नन्हे राम यादव भैंस चराकर वापस लौटते समय सिमली नदी में पैर फिसल जाने के कारण डूब कर मौत हो गई। इसके अलावा बांसगांव निवासी पहलवान पांडेय (62) की सर्पदंश से जान चली गई।
तराई के सूरतगंज क्षेत्र के हेतमापुर से लेकर टिकैतनगर दरियाबाद के इलाके तक जल तांडव मचा रही घाघरा से पीड़ितों को राहत और बचाव के कार्य नाकाफी साबित हो रहे हैं। दस पीएसी की मोटर बोट, चार एनडीआरएफ की और जिला प्रशासन की करीब सवा सौ नावें लगने के बावजूद लोगों को सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया नहीं जा रहा है। कई गांव में पानी भर जाने के कारण छतों और पेड़ों पर फंसे लोगों को एनडीआरएफ व पीएसी की टीम भोजन के पैकेट पहुंचा रही है।