बाराबंकी। जिले में बेखौफ चल रहे डग्गामार वाहन यातायात नियमों की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। इन्हें न तो अफसरों का खौफ है और न ही सवारियों के जीवन की चिंता। जहां मन में आया सवारियां बिठाने या उतारने लगते हैं। मनमाने ढंग से क्षमता से अधिक सवारी भरते हैं और बीच सड़क पर उतार देते हैं। रामसनेहीघाट में हुए हादसे के बाद भी क्षेत्र में डग्गामार वाहनों पर रोक नहीं लग पा रही है।
शहर में देवा तिराहा, नाका चौराहा व पल्हरी चौराहे से दर्जनों सवारी वाहन चलते हैं। यातायात पुलिस और एआरटीओ विभाग की नजर आए दिन इन पर पड़ती हैं लेकिन कभी कभार इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। बसों में मानक से अधिक यात्री प्रतिदिन बैठाए जाते हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक चलने वाले इन वाहनों से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं। ऐसे वाहनों की रफ्तार भी काफी अधिक होती है।
अधिक कमाई के चक्कर में चालक नियम कानून को ताक पर रखते हुए क्षमता से अधिक सवारी आड़ा-तिरछा बैठा लेते हैं। इस दौरान कई लोग वाहनों के गेट पर बैठने के साथ ही खड़ा होकर भी सफर करते हैं। वाहनों की तेज रफ्तार के दौरान यात्रियों में इस बात का भय बना रहता है कि कही कोई अनहोनी न हो जाए।
नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए लोगों को जोखिमभरी यात्रा कराने वाले ऐसे वाहन चालकों पर नजर पड़ने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। सुबह सात बजे से ही नाका चौराहा व पटेल तिराहे पर डग्गामार वाहनों का जमावड़ा लग जाता है। नियम कानून ताक पर रख कर सड़क पर वाहन खड़ा कर सवारी बैठाते हैं। ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के बावजूद उनकी मनमानी पर लगाम नहीं लग पा रही है।
एआरटीओ प्रवर्तन राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि डग्गामार वाहनों की धरपकड़ की जा रही है। प्रतिदिन हो रही चेकिंग में ऐसे वाहनों पर निगाह रहती है। जो मिलते हैं, उनपर कार्रवाई भी होती है। डग्गामारी के खिलाफ जल्द ही एक विशेष अभियान भी चलेगा।