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यूक्रेन में फंसे थे बाराबंकी के दस छात्र, आठ स्वेदश लौटे

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बाराबंकी। यूक्रेन में युद्ध व तनाव के बीच बाराबंकी के पांच नहीं बल्कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले 10 छात्र फंसे थे। इसमें वतन वापसी करने वाले दो छात्र जहां अपने घर पहुंच गए। वहीं एक दिल्ली में अपने मामा के यहां और एक लखनऊ में नाना के घर पर है।
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अब तक छात्रों से हुई बात में दो छात्र पोलैंड बॉर्डर से दिल्ली के लिए उड़ान भर चुके हैं। तो दो अन्य रोमानिया बॉर्डर पर फ्लाइट के इंतजार में है। जबकि सुमित हंगरी बॉर्डर पहुंचने की दूरी तय कर रहा है। जबकि राहत आयुक्त द्वारा उपलब्ध कराई सूची में शामिल जिले की छात्रा वंशिका अग्रवाल के बारे में अभी तक प्रशासन मोबाइल नंबर व पता सही न होने के कारण पता नहीं कर सका है।
बृहस्पतिवार को एमबीबीएस छात्रों के परिवारीजन बच्चों से हुई बातचीत के बारे में अमर उजाला को बताते हुए भावुक हो उठे। शहर के सत्यप्रेमी नगर निवासी एमबीबीएस छात्र प्रसून बृहस्पतिवार की देर रात अपने घर पहुंच गया। अपनों को देखते ही उनकी आंखें डबडबा उठीं। पिता चंद्र प्रकाश शुक्ला, भाई प्रखर व बहन वर्तिका के साथ मां की आंखें भी छलक पड़ीं।
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प्रसून ने बताया कि छात्रों को वतन वापसी कराने में भारत सरकार के प्रयासों की जितनी सराहना की जाए कम है। उसने बताया कि बस से 16 घंटे का सफर तय कर वह खारकीव से हंगरी बॉर्डर पहुंचा। उसके बाद बॉर्डर पार करने में तीन घंटे का समय लगा। यहां से इंडियन एंबेसी ने बस उपलब्ध कराई। जिससे साढ़े तीन घंटे का सफर तय कर वह बुडापेस्ट पहुंचा।
जहां से बृहस्पतिवार की रात में उसे फ्लाइट मिली और शुक्रवार की सुबह वह दिल्ली पहुुंचा। यूपी सरकार के अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट पर रिसीव कर यूपी भवन में कमरे में ठहराया। जहां फ्रेश होने के बाद उसे खाना उपलब्ध कराया गया। उसे बाद सरकार ने ही घर तक भेजने के लिए टैक्सी उपलब्ध कराई। उसने बताया कि इंडियन एंबेसी के सम्पर्क में आने के बाद उसका एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ।
नाना के घर लखनऊ पहुंचा अनस
यूक्रेन की उजरौथ यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस का छात्र अनस बुधवार को दिल्ली पहुंचा था। वहां से निकलकर वह बृहस्पतिवार को लखनऊ के आलमबाग में अपने नाना के घर पर रुक गया। अनस के घर पर भी उसके बाबा व मम्मी-पापा उसके आने का इंतजार कर रहे हैं।
रामनगर तहसील के सूरतगंज निवासी दादा जहीर अहमद ने बताया कि सरकार के प्रयासों से उनका पोता दिल्ली तो बुधवार को ही आ गया था। उसके सुरक्षित वतन वापसी से सभी की चिंता दूर हुई है। बृहस्पतिवार को लखनऊ में नाना के घर रुका अनस शुक्रवार को घर आ जाएगा।
एक सप्ताह पहले ही घर आ गया अहसान
यूक्रेन में तनाव के हालात को लेकर इंडियन एंबेसी की पहली एडवायजरी जारी होते ही अहसान फ्लाइट का टिकट कराकर घर वापस आ गया था। अहसान जैदपुर के चिकना महल निवासी रईस अहमद का बेटा है। वह तीन वर्ष से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। अहसान ने बताया कि इंडियन एंबेसी ने जैसे ही एडवायजरी जारी की।
उसने वहां के हालातों के बारे में परिवारीजनों को बताया। उसके बाद तत्काल 60 हजार रुपये का फ्लाइट का टिकट कराने के बाद वह घर आ गया। वह यूक्रेन से 22 फरवरी को निकला था। बॉर्डर क्रॉस करने के बाद फ्लाइट पकड़कर दिल्ली तक पहुंचा था।
पोलैंड बॉर्डर से प्रखर ने भरी उड़ान
सत्यप्रेमी नगर निवासी प्रखर सिंह के पोलैंड बॉर्डर से फ्लाइट मिलने का मैसेज मिलते ही परिवारीजनों के माथे पर चिंता की लकीर छटती दिखने लगी। उसके पिता विपिन सिंह बैसवार ने बताया कि प्रखर की मां काफी परेशान थी। मगर, उसकी चिकित्सक मौसी ने ढांढस बंधाए रखा और वह उसे रास्ता बताती रहीं।
हालांकि इंडियन एंबेसी के संपर्क में आने के बाद उसे किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। पोलैंड बॉर्डर पर केंद्रीय मंत्री जनरल बीके सिंह उससे मिले और घर तक पहुंचाने की बात कहते हुए तसल्ली दी। वहीं पर भोजन का पैकेट व पानी भी मिला। बृहस्पतिवार की दोपहर प्रखर ने मां को मैसेज कर बताया कि वह फ्लाइट में बैठ गया है। शुक्रवार को दिल्ली पहुंच जाएगा।
प्रज्ज्वल को मिली दिल्ली की फ्लाइट
खारकीव की वीएन कार्जिन यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले शहर के देवा रोड निवासी प्रज्ज्वल को भी पोलैंड बॉर्डर से दिल्ली की फ्लाइट मिल गई है। यह बात प्रज्ज्वल के पिता रामतीर्थ ने बताई। उन्होंने बताया कि सरकार काफी मदद कर रही है। बेटे से फोन पर हुई बात में उसने बताया कि इंडियन एंबेसी ने उसे फ्लाइट में बैठा दिया है। शुक्रवार को वह दिल्ली पहुंच जाएगा। यह खबर मिलने के बाद बेटे के सुरक्षित लौटने की उम्मीद से पूरा परिवार सरकार के प्रयासों की सराहना कर रहा है।
दिल्ली में मामा के घर रुका अनंत
यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाला हैदरगढ़ तहसील के जलालपुर निवासी अनंत प्रताप सिंह भी बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंच गया। जहां यूपी भवन से उसके मामा ने रिसीव किया। अनंत के पिता निर्मल बहादुर सिंह ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध की खबरों से पूरा परिवार परेशान था।
मगर, भारत सरकार के प्रयासों से उसका बेटा अनंत प्रताप बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंच गया। जहां उसे एयरपोर्ट से यूपी बॉर्डर ले जाया गया। इसकी सूचना पर पहुंचे उसके मामा ने उसे रिसीव कर लिया। वह दिल्ली में हैं। शुक्रवार केे घर आ जाएगा।
रोमानिया बॉर्डर पहुंचा अंश
शहर के फोटोवाली गली निवासी पुनीत कुमार खरे का बेटा अंश खरे भी यूक्रेन से निकल रोमानिया बॉर्डर पहुंच गया है। एमबीबीएस के छात्र अंश के पिता पुनीत खरे ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध छिड़ने की खबरों के बाद पूरा परिवार परेशान था। फोन पर पल-पल की जानकारी कर बेटे को हौसला बंधाया जाता था। दो दिन पहले इंडियन एंबेसी से संपर्क के बाद अंश रोमानिया बॉर्डर आ गया है। जहां पर एंबेसी ने सुरक्षित ठिकाने पर रोकने के साथ ही जल्द ही दिल्ली की फ्लाइट मिलने का भरोसा दिया है।
बस से हंगरी बॉर्डर की दूरी तय करा सुमित
यूक्रेन के खारकीव में बंकर में फंसा सुमित भी बस के रास्ते हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने की दूरी तय कर रहा है। शहर के ही दीनदयाल नगर निवासी सुमित के भाई संतोष ने बताया कि सुमित ने बस से हंगरी बॉर्डर आने का वीडियो भेजा। उसके बाद परेशान परिवारीजनों को भरोसा हुआ। जहां अन्य छात्र बॉर्डर पार कर चुके थे। वहीं सुमित का इंडियन एंबेसी से सम्पर्क न होने से सभी परेशान थे। हालांकि वह स्वयं भी राजस्थान, कर्नाटक व भुवनेश्वर के मित्रों के साथ बॉर्डर की ओर आ रहा है।
मुईद को भी बॉर्डर पर फ्लाइट का इंतजार
रामसनेहीघाट तहसील के खजूरी चिर्रा निवासी सईद अहमद का बेटा मुईद अहमद भी यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद से पूरा परिवार परेशान था। उसके चचेरे भाई अदनान ने बताया कि मुईद को इंडियन एंबेसी की मदद से रोमानिया बॉर्डर तक लाया गया है। जहां से उसे शुक्रवार को फ्लाइट मिलेगी। इस बारे में उसकी इमो पर ऑनलाइन सईद से बात हुई थी। इससे पहले तहसीलदार रामसनेहीघाट ने उसके घर पहुंचकर जल्द ही मुईद के वतन वापसी का भरोसा दिलाया था।
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