बाराबंकी। पूर्वोत्तर रेलवे के प्रमुख मार्ग बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा पर हाईस्पीड ट्रेनें चलाने की योजना परवान चढ़ रही है। यह रेलवे ट्रैक 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लायक बन चुका है। मगर रेलवे इसे अभी 150 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने लायक बनाना चाहता है। दरअसल रेलवे की मंशा है कि इस रेलवे ट्रैक पर वंदेमातरम, शताब्दी व दुरंतो जैसी हाई स्पीड ट्रेनें भी चल सकें।
पिछले दो साल में 425 किमी लंबे बाराबंकी से गोरखपुर होते हुए छपरा मुख्य रेलमार्ग तथा बाराबंकी से अयोध्या कैंट जैसे रेल मार्गों पर काफी काम हुए। बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा रेलवे मार्ग पर ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम के अलावा पटरियों को भी मजबूत किया गया है।
अयोध्या रेल मार्ग पर अभी कुछ दिन पहले ही विद्युतीकरण पूरा हुआ है और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन चलाने का ट्रायल भी हो चुका है। इतना ही नहीं बाराबंकी-गोरखपुर ट्रैक पर कवच नामक तकनीकी का प्रयोग किया गया है ताकि ट्रेन हादसे रोके जा सकें। रेलवे की मंशा है कि बाराबंकी से गोरखपुर होते हुए छपरा तक का रेलवे मार्ग 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लायक हो सके।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह कहते हैं कि बीते वित्तीय वर्ष 2021-22 में पूर्वोत्तर रेलवे ने काफी विकास किया। श्री सिंह के अनुसार बाराबंकी से गोरखपुर छपरा रेल मार्ग करीब 425 किलोमीटर लंबा है। इस रूट पर 160 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेनें चलेंगी। रफ्तार बढ़ाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जल्द ही काम धरातल पर दिखेगा।
दक्षिण की यात्रा कराएगी हैदराबाद स्पेशल
हैदराबाद-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन से बाराबंकी के लोगों को भी लाभ मिलेगा। यह साप्ताहिक स्पेशल इसी माह अप्रैल से ही चल रही है और अभी एक, आठ, 15, 22, 29 मई तथा पांच, 12, 19, 26 जून को भी चलाई जाएगी। ट्रेन गोरखपुर से सुबह 8:30 बजे रवाना होकर लखनऊ सिटी दोपहर 1:10 बजे व ऐशबाग 1:28 बजे तथा हैदराबाद दूसरे दिन शाम 4:20 बजे पहुंचेगी। इसका ठहराव बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर भी होगा। इस ट्रेन में दो जनरल, सात स्लीपर, नौ थर्ड एसी, दो सेकंड एसी और दो एसएलआर समेत कुल 22 कोच लगाए गए हैं।
बाराबंकी-छपरा रेल ट्रैक पर ट्रेनों की गति बढ़ाए जाने को लेकर काफी काम हुआ है। इसका लाभ बाराबंकी के यात्रियों को भी मिलेगा। ट्रैक पर 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों को चलाने की योजना है।
-पियूष वर्मा, अधीक्षक, बाराबंकी रेलवे स्टेशन