पांच दिन पूर्व बंद पड़ी शुगर मिल में तेंदुआ पकड़े जाने के बाद दहशत खत्म हुई थी। दो दिन से तेंदुए के शावकों की दहाड़ सुनने का दावा करने वाले सुरक्षाकर्मियों के साथ स्थानीय लोगों में एक बार फिर दहशत का माहौल हो गया। एफसीआई के कर्मचारियों को भी आवाज सुनाई देने के साथ दो मोर व बंदरों के शव क्षत-विक्षत मिलने पर कर्मचारियों में भी दहशत फैली हुई। इसकी सूचना वन विभाग को देकर लोगों ने पिंजरे में बकरी बांधे जाने व शावकों को पकड़े जाने की मांग की है।
बीते 13 जुलाई को बंद शुगर मिल में तेंदुआ के पिंजरे में फंसने के बाद लोगों की बातें झुठलाने वाले वन विभाग के अधिकारी को यकीन हुआ था। वहीं लोगों का यह भी कहना है कि तेंदुए को उसके दो शावकों के साथ देखा गया था। उसके शावक न मिलने पर लोगों में बनी दहशत बुधवार की बीती रात मिल में सुरक्षाकर्मी राम आशीष, रमेश व हरिशंकर सिंह सीटी बजाते हुए मैनेजर आवास के पास पहुंचे तो वहां पर झाड़ी से दहाड़ सुनाई दी।
सुरक्षा कर्मी का दावा है कि जैसे ही उसे टार्च की रोशन लगाई तो उसे भागते हुए देखा गया। सुबह इसकी जानकारी सुपरवाइजर रामनरेश यादव को दी। रामनरेश ने बताया कि दो दिन से हमें भी आवाजें सुनाई दे रही हैं। एफसीआई में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि गोदाम नंबर 8 व 11 के पीछे दो मोर व बंदरों के शव क्षत-विक्षत पड़े मिले हैं व रात को जैसे पिंजरे में तेंदुआ दहाड़ता था उसी से मिलती जुलती आवाजें भी सुनाई पड़ती है।
बुधवार को लोगों ने वन दरोगा अनिलकांत गुप्ता को फोन पर शावकों के होने की सूचना दी थी, और जंगल में रखे पिंजरे में बकरी बांधने की मांग की थी। पर इस ओर वन विभाग के कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वन दरोगा अनिल कांत गुप्ता ने कहा कि मेढ़िया फार्म, शुगर मिल व एफसीआई की ओर शावकों के देखे जाने की सूचना पर वन रक्षकों के साथ जाकर देखा गया। पर कहीं न तो कोई पगचिंह मिले और ही उसका पता लगा। बराबर नजर रखी जा रही है, पुख्ता जानकारी होने पर पिंजरे में बकरी बांधने के साथ ही कांबिग की जाएगी।