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सरयू का जलस्तर घटा, कटान तेज

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कोटवाधाम/गणेशपुर (बाराबंकी)। सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ ही करीब आधा दर्जन गांव कटान की चपेट में आ गए हैं। कटान देख तराई के लोगों में दहशत फैल गई है और लोग परिवारीजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे हैं।
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लोगों का कहना है कि कटान रोकने के लिए ही बाढ़ खंड द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, बावजूद इसके विभाग कटान रोकने में पूरी तरह से नाकाम है। इससे तराई के लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का कहर जारी है। कभी बाढ़ का पानी गांवों तक पहुंच जाता है तो कभी कटान तेज होने से लोग घरबार छोड़ रहे हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर जाने के बाद करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ से घिर गए थे।
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जलस्तर कम होने के साथ ही अब तेलवारी, कोरियन पुरवा व तपेसिपाह समेत करीब आधा दर्जन गांव कटान की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों के पास कटान तेज होने से लोगों में दहशत पैदा हो गई है और लोग परिवारीजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे हैं।
कटान की सूचना बाढ़ खंड को दी गयी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने भले ही कटान रोकने का काम शुरू करा दिया हो लेकिन जिस तरह से नदी का पानी आए दिन कटान कर रहा है, उससे अब तक कराए गए कार्यों पर सवालिया निशान जरूर लगने लगे हैं।
तराई के रहने वाले कुंवारे, तेजई, बलराम, सुनीता, फेराई, श्रीराम व बसंती आदि के मकान कटान की जद में आ गए हैं। लोग घरों से सामान निकाल कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने लगे हैं। इन लोगों का आरोप है कि कटान रोकने और गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों रुपये बाढ़ खंड द्वारा खर्च किए गए।
सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतना पैसा कहां पर खर्च कर दिया गया जो आए दिन कटान शुरू हो जाती है। इससे साफ है कि ज्यादातर काम कागजों पर ही करा लिए गए हैं। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो दोषी हो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सिरौलीगौसपुर के एसडीएम सुरेंद्र पाल विश्वकर्मा ने बताया कि सरयू नदी का पानी तेजी से घट रहा है जिससे तराई में कई स्थानों पर कटान शुरू हो गई है। कटान की जानकारी मिलते ही इसकी सूचना बाढ़ खंड को देते हुए जल्द से जल्द कटान रोकने के लिए कहा गया है। तराई के लोगों को कोई असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
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