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सम्मान निधि में साढ़े छह हजार किसान मिले अपात्र

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बाराबंकी। सम्मान निधि पाने में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने को लेकर मोदी सरकार की ई-केवाईसी की अनिवार्यता शुरूआती दौर में ही सफल होता दिख रही है। यहां पर करीब डेढ़ लाख किसानों ने ई-केवाईसी कराई और उसमें से साढ़े छह हजार अपात्र पकड़ में आए हैं। जबकि अभी सम्मान निधि पा रहे साढ़े तीन लाख किसानों की ई-केवाईसी होना शेष है। सभी की ई-केवाईसी हुई तो लाभ पाने वाले करीब 20 हजार अपात्रों के मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए पोर्टल पर पांच लाख 47 हजार 570 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है। इसमें पांच लाख छह हजार 825 किसानों को सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा है। सत्यापन में करीब 78 हजार किसान अपात्र मिले। वहीं पांच हजार 685 भूमिहीन, आयकर दाता, सरकारी नौकरी, पेंशनर अधिवक्ता, पति-पत्नी व मृतक सम्मान निधि का लाभ लेते मिलीं। उनकी सम्मान निधि की किस्त रोक दी गई।
उसके बाद सरकार ने इस बड़े फर्जीवाड़े को रोकने के लिए योजना का लाभ पा रहे किसानों की ई- केवाईसी बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य कर दिया। इसके तहत शनिवार तक जिले के एक लाख 55 हजार 865 किसानों ने अपनी ई-केवाईसी कराई। इसमें से छह हजार 491 किसान अपात्र पाए गए। जो सम्मान निधि का लाभ पा रहे हैं।
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यह हाल तब है जब अभी सम्मान निधि पाने वाले करीब साढ़े तीन लाख किसानों की ई-केवाईसी होना शेष है। विभाग का मानना है कि योजना का लाभ पाने वाले सभी किसानों ने ई-केवाईसी कराई तो करीब 20 हजार से अधिक अपात्र किसान सामने आएंगे।
ई-केवाईसी से किसानों को फायदा
ई-केवाईसी कराने से जहां प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। वहीं किसानों के भी कई फायदे हैं। किसानों की दूसरों के खाते में किस्त जाने की शिकायतें कम होगी। वहीं खाता बंद होने पर उसे बदलवाने के लिए विभाग के चक्कर काटने से निजात मिलेगी।
क्योंकि ई-केवाईसी कराने वाले किसानों का एक खाता बंद होने की दशा में सीधे दूसरे खाते में सम्मान निधि पहुंच जाएगी। वहीं इस प्रक्रिया के बाद किसानों को सम्मान निधि को लेकर विभाग के चक्कर काटने से निजात मिलेगी।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पाने वाले किसानों की ई-केवाईसी की व्यवस्था से पूरा डाटा फिल्टर हो जाएगा। ऐसे में फर्जीवाड़ा कर लाभ ले रहे अपात्र जहां बाहर होंगे। वहीं पात्र किसानों को इसका लाभ आसानी से मिलता रहेगा। अब तक जिन करीब डेढ़ लाख किसानों ने ई-केवाईसी कराई है। उसमें से करीब साढ़े छह हजार अपात्र पाए गए हैं।
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-अनिल कुमार सागर, उप कृषि निदेशक
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