बाराबंकी। बस हादसे का शिकार हुए लोग तीन महीने पहले धान की रोपाई करने के लिए पंजाब व हरियाणा गए थे। यह लोग बिहार से गुट बनाकर जाते हैं और वहां पर ठेका लेकर धान रोपाई का काम करते हैं। काम समाप्त करने के बाद घर जा रहे मजदूरों को यह नहीं पता था कि पल भर में उनका सब कुछ उजड़ने जा रहा है।
हादसे में किसी ने अपने भाई को खोया तो किसी के पिता की जान चली गई। कुछ पल पहले जिन परिजनों के साथ हंसी, खुशी घर जा रहे थे कुछ ही क्षण बाद उन्हीं का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए खड़े थे। पीड़ितों ने कहा इस हादसे ने पल भर में सब कुछ उजाड़ दिया।
बस हादसे में मामूली रूप से चोटिल हुए जिला सहरसा बिहार निवासी राजेश मुखिया ने बताया कि उनके साथ चचेरे भाई सिकंदर मुखिया थे और वह पंजाब में धान रोपाई का काम कर लौट रहे थे। हादसे में सिकंदर मुखिया की मौत हो गई है। इसके साथ ही सीतामढ़ी के रहने वाले फगुनी ने बताया कि उनका चौदह लोगों का ग्रुप धान की रोपाई करने के लिए हरियाणा गया था।
इस हादसे में फगुनी का सगा भाई मोनू सहानी, चेचेरे भाई जगदीश सहानी, फुफुरे भाई इंदल महतो, नरेश व एक अन्य रिश्तेदार जय बहादुर की मौत हो गई है। इनके चौदह लोगों के ग्रुप में कुल पांच लोगों की हादसे में जान गई है। जिला अस्पताल में भर्ती सुशील पंडित बताते हैं कि हादसे के दौरान उनका मोबाइल और 15 हजार रुपये गायब हो गया।
इसके साथ ही सिपौल बिहार के रहने वाले संजय मंडल के पिता बलराम मंडल की भी हादसे में मौत हो गई। इसी तरह सिपौल के रहने वाले मौजीलाल का भतीजा बैजनाथ भी हादसे का शिकार हो गया है। हादसे में अपनों को गवांने वाले लोगों के आंसू पोस्टमार्टम हाउस में थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सभी के घर से भी बराबर हाल जानने के लिए फोन आ रहे थे।
पीड़ित किसी तरह खुद को संभाल परिजनों के शव का पोस्टमार्टम करवाने में लगे हैं। इसी तरह हादसे में मिश्री सदा, रेनू, बिंदसदा, निवासी मधुबनी भी चोटिल हुए लेकिन इन्हें मामूली चोट थी और प्राथमिक उपचार के बाद इन्हें जाने दिया गया। बस में सवार मजदूरों ने बताया कि उनसे पंजाब व हरियाणा से बिहार तक जाने के लिए 1400 रुपये किराया वसूला गया था। बस में महिलाएं व बच्चे भी थे।