कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी की कटान और तेज हो गई है। पानी की चपेट में आकर खेती योग्य करीब बीस बीघे भूमि और नदी की धारा में समा गई है। वहीं करीब एक दर्जन से ज्यादा मकान नदी के निशाने पर आ गए हैं। जिस तेजी के साथ नदी का पानी कटान कर आबादी की ओर बढ़ रहा है उससे यहां के लोगों में दहशत का माहौल है। लोग परिवारीजनों के साथ पलायन की तैयारी में जुट गए हैं। आरोप है कि बाढ़ खंड कटान रोकने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाने का काम कर रहा है जिसकी वजह से कटान रुक नहीं पा रही है।
एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार, सरयू नदी का पानी खतरे के निशान से महज 22 सेमी. दूर है। लेकिन गोबरहा और टेपरा गांव के पास हो रही कटान और तेज हो गई है। कटान की चपेट में आकर खेती योग्य करीब बीस बीघे भूमि और नदी की धारा में समा गई है। इसके साथ ही नदी का पानी खेतों को काटते हुए तेजी से आबादी की ओर बढ़ रहा है।
इससे तराई के करीब एक दर्जन मकानों के नदी की धारा में समाने का खतरा बढ़ गया है। नदी का रूप देख यहां रह रहे लोग परिवारीजनों के साथ पलायन की तैयारी में तेजी के साथ जुट गए हैं। लोगों का आरोप है कि बाढ़ खंड के अधिकारी कटान रोकने के लिए नदी में हरा पेड़ और ईंट को बोरियों में भरकर डाल सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। बार-बार हो रही कटान को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इससे हम तराई के लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
करोड़ों खर्च फिर भी नहीं रुक रही कटान
नदी की बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी जब नदी में पानी बढ़ता है तराई के गांवों के पास कटान तेज हो जाती है। नदी का पानी खेतों को काटते हुए गांवों तक पहुंच जाता है जिससे तराई के लोगों को गांव छोड़ तटबंध पर शरण लेनी पड़ती है। लोगों का आरोप है जब करोड़ों रुपये गांवों को बचाने के लिए खर्च कर दिए गए तो फिर गांवों तक पानी कैसे पहुंच जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए। जो भी अधिकारी इसमें दोषी पाए जाएं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
कटान की जद में आया बोर्ड
भाजपा विधायक शरद अवस्थी द्वारा परियोजनाओं का भूमि पूजन कर शुभारंभ किया था। इस दौरान एक शिलापट लगाया गया था जो विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते कटान की जद में आ गया है। बोर्ड से महज कुछ दूरी पर नदी का रह गया है। यहां के लोगों ने बताया कि जिस तरह से कटान हो रही है वह किसी भी समय इस शिलापट को भी अपने चपेट में ले सकती है।
नदी द्वारा की जा रही कटान को रोकने का कार्य बाढ़ खंड द्वारा तेजी से किया जा रहा है। नदी का पानी गांवों तक न पहुंचे इसके प्रयास जारी हैं। नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है। बाढ़ खंड में लगे कर्मचारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
-सुरेन्द्र पाल विश्वकर्मा, एसडीएम सिरौलीगौसपुर