बाराबंकी। टिकट को लेकर सपा के दिग्गजों के बीच मची घमासान का फॉर्मूला समाजवादी पार्टी हाईकमान ने निकाल लिया है। पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, राकेश कुमार वर्मा और फरीद महफूज किदवाई जहां से टिकट मांग रहे थे वहां से बदलकर दूसरी सीटों पर भेज दिया है। बुधवार को इसकी चर्चा के बाद जिले में सरगर्मियां काफी तेज हो गई है।
जिस तरह गोप व राकेश टिकट के लिए अपनी प्रतिष्ठा का दांव लगाए थे उसी तरह कुर्सी में फरीद के मुकाबले टिकट लेने वालों की संख्या इतनी थी कि उससे आसानी से बगावत को रोकना आसान नहीं था। इसी कारण सपा मुखिया अखिलेश यादव ने तीनों को बुलाकर जिले के भीतर ही मनचाही सीटों की बजाए पार्टी के फैसले पर अमल करने को कहा।
जिले की चार विधानसभा क्षेत्र की सीटों में घोषित प्रत्याशियों में रामनगर से दावा करने वाले राकेश वर्मा को कुर्सी व अरविंद सिंह गोप को दरियाबाद से टिकट दिया गया है। जबकि कुर्सी से पूर्व विधायक रहे फरीद महफूज किदवाई को रामनगर से प्रत्याशी बनाया है। सभी के विधानसभा क्षेत्रों में फेरबदल के पीछे सबसे बड़ा कारण गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई मानी जा रही है।
अब यह फार्मूला कितना सफल होगा यह तो आने वाला समय बताएगा। मगर हाईकमान के आदेश पर तीनों प्रत्याशी चुनाव मेें जुट गए हैं। उधर दो बार से लगातार चुनाव जीतने वाले बाराबंकी सदर सीट के विधायक धर्मराज उर्फ सुरेश यादव को पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है। यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है।
पार्टी में फॉर्मूले की मजबूरी
रामनगर विधानसभा क्षेत्र से 2017 में अरविंद सिंह गोप और राकेश कुमार वर्मा के बीच दावेदारी की गई थी। किंतु हाईकमान ने राकेश को कैसरगंज और गोप को रामनगर से टिकट दिया था। इसे लेकर राकेश ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। बेनी बाबू के समय से शुरू हुई यह वर्चस्व की जंग तब से रामनगर को लेकर छिड़ी हुई है।
इस बार भी दावेदारी को लेकर जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में इसकी चर्चाएं थीं कि दोनों में किसको टिकट मिलेगा। कोई भी झुकने को तैयार नहीं था। पार्टी हाईकमान इसे लेकर चिंतित था। वह ऐसे फार्मूले की तलाश में था जिसमें पार्टी में बगावत न हो और नेताओं की साख भी बच जाए। इसी के तहत सबके क्षेत्र बदलकर पार्टी ने सबको खुश रखने की चाल चली है।
दिग्गजों को खुश करने में ठगा महसूस कर रहे कार्यकर्ता
सपा मुखिया के विश्वसनीय और निकट के कई युवा नेता वर्षों से पार्टी का झंडा, डंडा लेकर जुटे हुए थे। उन्हें आशा थी कि इस बार पुरानों की जगह उन्हें मौका मिलेगा। किंतु दरियाबाद और कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में कई युवा और तेजतर्रार नेता इस फार्मूले से अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सिर्फ तीन नेताओं को ही तवज्जो देकर अपने तमाम कार्यकर्ताओं को साइड लाइन कर दिया गया है।