महादेवा (बाराबंकी)। रामनगर विधानसभा सीट ने भले ही सभी प्रमुख दलों को जिता कर सदन भेजा हो किंतु यहां पर जीत की हैट्रिक लगाना तो दूर लगातार दूसरी बार कोई उम्मीदवार नहीं जीत सका है। कारण कुछ भी हो पर यहां के नतीजे बताते हैं कि जनता अपनी मांगों को पूरा करने के लिए हर बार नए चेहरे पर दांव तो लगाती है। मगर पांच साल में उसे निराशा ही हाथ लगी है। यही कारण है कि वह अगले चुनाव में नए चेहरे पर जीत का सहरा बांधती आई है।
सरयू नदी के किनारे तराई में बसी विधानसभा क्षेत्र की जनता किसी भी दल और व्यक्ति के प्रभाव में नहीं रही है। आजादी के बाद से अब तक चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो यहां न किसी नेेता का एकाधिकार रहा है और न ही एक दल का दबदबा। हर बार चुनाव में नए उम्मीदवार पर वोटरों ने विश्वास जताया है।
इसी कारण जीत की हैट्रिक लगाने का रिकॉर्ड तो दूर लगातार दूसरी बार कोई भी प्रत्याशी यहां से विधानसभा नहीं पहुंच सका है। परिसीमन में यहां का भौगोलिक और सामाजिक तानाबाना भी इधर-उधर हुुआ किन्तु मतदाताओं का रुझान एक नेता पर नहीं टिका। तीन लाख 37 हजार मतदाताओं वाली इस सीट पर कई दिग्गजों ने जीत जरूर दर्ज की किंतु मतदाताओं को अपना बनाकर नहीं रख पाए।
कब कौन जीता चुनाव
साल 1952 में भगवती प्रसाद शुक्ला, 1957 में सरस्वती शुक्ला, 1962 में गिरजा प्रसाद शुक्ला, 1967 में शेष नारायन शुक्ला, 1972 में भगवती प्रसाद वर्मा, 1977 में डॉ. मसउदुल हसन नोमानी, 1980 में गजेंद्र सिंह, 1985 में फरीद महफूज किदवई, 1989 में शिवकरन सिंह, 1991 (उपचुनाव) में फरीद महफूज किदवई, 1993 में राजलक्ष्मी वर्मा, 1996 में सरवर अली, 2002 में राजलक्ष्मी वर्मा, 2007 में अमरेश शुक्ला, 2017 में शरद कुमार अवस्थी।