बाराबंकी। ड्राइविंग सिखाने के नाम पर मोटर ट्रेनिंग स्कूल का धंधा भी जिले में खूब परवान चढ़ रहा है। शहर व कस्बों मेें कई मोटर ट्रेनिंग स्कूल अवैध रूप से चल रहे हैं। इन स्कूलों के संचालक नियमों को नजरअंदाज कर सड़कों पर बेरोकटोक नौसिखियों को गाड़ी चलाना सीखा रहे हैं। इनके पास न डिप्लोमा है और न ही वाहन सिखाने का लाइसेंस। शुक्रवार को यात्री माल कर अधिकारी ने ऐसे एक वाहन को सीज कर दिया जो बिना पंजीयन कार चलाना सिखा रहा था। जांच के लिए समिति का गठन किया गया है।
शहर में बिना लाइसेंस के कई ड्राइविंग स्कूल चल रहे हैं। बिना पंजीयन कार ड्राइविंग सिखाने के नाम पर काफी बड़ा कारोबार चल रहा है। इसके चलते कई ड्राइविंग स्कूल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। बिना पंजीयन चलने वाले ट्रेनिंग स्कूल मानकों को पूरा नहीं करते हैं। साथ ही अनुभवहीन ड्राइवरों के सहारे लोगों को भीड़भाड़ वाली सड़क पर कार चलाना सिखाते हैं, जो कि जोखिम भरा होता है। इससे विभाग को राजस्व का भी नुकसान होता है।
शुक्रवार को यात्री माल कर अधिकारी ने लखनऊ-अयोध्या रोड पर एसबीआई के पास कार चला रहे एक ट्रेनर को कार सिखाते पकड़ लिया। एआरटीओ प्रशासन ने ट्रेनिंग स्कूल की जांच के लिए समिति का गठन किया है। कार सीख रहे आवास विकास निवासी रिशू ने बताया कि ट्रेनिंग सेंटर के पंजीयन के बारे में नहीं मालूम है।
ज्यादातर सड़क पर ही ड्राइविंग सिखाई जाती है। एआरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने बताया कि बिना पंजीयन मोटर ट्रेनिंग स्कूल चलाए जाने की बात सामने आई है। एक मोटर ट्रेनिंग स्कूल द्वारा ड्राइविंग सिखाया जा रहा था, जिसका विभाग में पंजीकरण नहीं है। जिस वाहन से सिखाया जा रहा था उसे सीज कर दिया गया है और जांच के लिए समिति का गठन किया गया है।
बीते तीन साल से चल रहा ट्रेनिंग स्कूल
शहर से सटे सफेदाबाद में शिवा मोटर ट्रेनिंग के नाम से बिना पंजीयन ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का संचालन हो रहा है। लेकिन विभाग को पता ही नहीं चला। बताते हैं कि इन संचालकों ने कम सैलरी पर ड्राइवर रखे हुए हैं, जो अनुभवहीन होते हैं और लोगों को कार चलाना सिखाते हैं। इसके अलावा ड्राइविंग सिखाने के लिए इनके पास खाली मैदान भी नहीं होता है। इस वजह से मेन रोड या कॉलोनी की सड़कों पर कार चलाना सिखाया जाता है।