बाराबंकी। मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़े जाने को लेकर केंद्र सरकार तय मानक पर खरा उतरने वाले मदरसों को बजट मुहैया कराकर उनका आधुनिकीकरण कराती है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इसकी मॉनीटरिंग करता है। पिछले पांच साल के अंदर 17 मदरसे ऐसे मिले जो मानक को पूरा नहीं कर सके। इस पर उन्हें आधुनिकीकरण का लाभ नहीं दिए जाने को लेकर सूची से बाहर कर दिया गया।
जिले में कुल 309 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें 22 सहायता प्राप्त मदरसे भी शामिल हैं। इनमें हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं दीनी शिक्षा के साथ मूल शिक्षा भी ग्रहण कर रही हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार इन मदरसों को आधुनिकीकरण कराने के लिए बजट उपलब्ध कराती है। इस बजट से फर्नीचर, कम्प्यूटर, इंटरनेट आदि की व्यवस्था की जाती है। मगर इसका लाभ लेने के लिए मदरसों के कुछ मानक तय किए गए हैं।
उन पर खरा उतरने पर ही लाभ मिलता है। पांच साल के अंदर आधुनिकीकरण का लाभ लेने के लिए आवेदन करने वाले मदरसों की जांच के बाद मानक न पूरा करने पर उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बालेंदु द्विवेदी ने बताया कि आधुनिकीकरण का लाभ मानक पूरा करने वाले मदरसों को ही मिलता हैँ। इसमें छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए उचित कमरे, बच्चों की संख्या, पेयजल, अच्छा भवन आदि मानक शामिल हैं।