बाराबंकी। अस्पतालों में न तो जांच की सुविधा है और न ही प्लेटलेट्स। इसके बावजूद डेंगू से निपटने की सभी तैयारियां होने का दावा किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को सिर्फ रेफर का पर्चा ही थमाया जाता है। ये हाल तब है जब जिले में डेंगू का एक मरीज मिल चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदार बेखबर हैं। जिला अस्पताल में आठ बेड का वार्ड बनाकर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है।
बरसात के बाद डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी ने भी जिले में पांव पसारना शुरू कर दिया है। शहर के फैजुल्लागंज वार्ड में डेंगू का एक मरीज मिल चुका है। जिसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहां पर उसका इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के अलावा जिले में 20 सीएचसी और 57 पीएचसी संचालित हैं लेकिन देखा जाए तो कहीं पर डेंगू से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं है।
जिला अस्पताल में जांच की सुुविधा है तो प्लेटलेट्स की व्यवस्था नहीं है। इससे यहां पर आने वाले मरीजों को जांच में डेंगू की पुष्टि के बाद रेफर कर दिया जाता है। सीएचसी पर न तो जांच की सुविधा है और न ही प्लेटलेट्स के इंतजाम। यदि किसी मरीज में जांच के बाद डेंगू की पुष्टि होती है तो चिकित्सक उपचार के बजाए रेफर का पर्चा थमा देते हैं।
ऐसी दशा में मरीज की जान बचाने के लिए लखनऊ के निजी अस्पतालों में भर्ती कराने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस बृजेश कुमार का कहना है कि उनके यहां डेंगू की जांच की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे मरीजों के लिए आठ बेड का एक अलग वार्ड भी बना दिया गया है। अभी तक डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है।
जिले की सभी सीएचसी पर डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं-कहीं पर वार्ड बन भी गए हैं। डेंगू की किट मंगा ली गई है। जल्द ही इसे सीएचसी पर भेज दिया जाएगा।
-डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ