कोटवाधाम (बाराबंकी)। टीका लगने के बाद उससे फैले इंफेक्शन की चपेट में आए एक मासूम की इलाज के दौरान शनिवार को मौत हो गई। परिवारीजनों ने एएनएम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी। जिस पर गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार करा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है, पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
क्षेत्र के मदारपुर गांव में 18 अगस्त को सामान्य टीकाकरण कैंप का आयोजन किया गया था। यहां पर गांव के नंदलाल ने भी अपने चार माह के मासूम आशीष को भी टीका लगवाया था। नंदलाल का आरोप है कि एएनएम द्वारा टीकाकरण में लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से उस स्थान पर सूजन आ गई।
हम उपचार के लिए सीएचसी ले गए, लेकिन वहां कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद हम लोग उसे निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां पर चिकित्सक ने इलाज शुरू कर दिया। नंदलाल ने बताया कि चिकित्सकों ने उसे बताया था कि बच्चे के पूरे शरीर में इंफेक्शन फैल गया है, हम कोशिश कर रहे हैं। लेकिन शनिवार को मासूम की मौत हो गई।
मौत की सूचना से गांव के लोग आक्रोशित हो गए और धरना प्रदर्शन की तैयारी में जुट गए। इस पर हरकत में आई पुलिस ने भारी संख्या में गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया। वहीं मासूम की मौत की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच मेें जुट गई है।
परिवारीजनों ने टीकाकरण में लापरवाही का आरोप लगाकर कोतवाली में तहरीर दी है। परिवारीजनों का आरोप है कि कोतवाली पुलिस ने बेटे के शव का पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार करा दिया। कोतवाली प्रभारी दयाशंकर सिंह ने बताया कि गांव की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस भेजी गई थी। परिवारीजन शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं थे।
परिजन बोले पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत
परिवारीजनों का आरोप है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से ही मासूम के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। क्योंकि इन्हें डर था कि यदि पोस्टमार्टम कराया गया तो इसमें मौत का कारण स्पष्ट हो जाएगा। यदि विभाग की लापरवाही सामने आई तो हम लोगों का फंसना तय है। यही कारण है कि मासूम के शव को पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।
मामले की कराई जा रही जांच
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के मदारपुर गांव में एक मासूम की मौत टीका लगने से होने की जानकारी मिली है। यदि टीके से मौत हुई होती तो उसी दिन या फिर दो दिन के अंदर हो जाती है। फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ