बाराबंकी। नगर पंचायतों में कूड़े के निस्तारण को लेकर अच्छी पहल हुई है। जिले की सभी 14 नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाए जाएंगे। प्रत्येक प्लांट पर 50 लाख रुपये खर्च होंगे। ऐसे में इस काम पर करीब आठ करोड़ रुपये का खर्च होगा। इन प्लांटों पर मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) होगा।
जिसके माध्यम से सूखा व गीला कूड़ा का अलग-अलग निस्तारण होगा। कूड़े से कम्पोस्ट खाद बनाई जाएगी जो खेतों की पैदावार भी बढ़ाएगा। इसे लेकर सीडीओ ने सभी नगर पंचायतों के ईओ को निर्देश जारी कर दिए हैं। नगर पंचायतों में इसे लेकर भूमि की तलाश हो रही है जबकि दो जगहों पर जमीन का चिन्हांकन करवाकर काम भी शुरू हो चुका है।
जिले की सभी नगर पंचायतों में कूड़े के निस्तारण को लेकर अभी तक कोई ठोस योजना नहीं थी। कूड़ा या तो गड्ढों में डाला जाता है या फिर खाली पड़ी जमीनों पर फेंका जाता है। स्वच्छ भारत मिशन के अभियान के तहत जब नगर पंचायतों को लेकर कार्ययोजना बनने लगी तो सबसे अहम सवाल यहीं था कि आखिर कूड़े का निस्तारण कैसे होगा।
साफ-सफाई तभी संभव हो सकती है जब रोजाना निकलने वाले कूड़े को लेकर कोई स्थायी उपाय सोचा जाय। इसके लिए शासन ने सभी नगर पंचायतों में मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी यानी एमआरएफ सेंटर बनाने की मंजूरी दी। इसे लेकर सीडीओ एकता सिंह ने नगर पंचायतों के अधिकारियों के साथ बैठक करके मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर के निर्माण की बात कही।
कार्ययोजना बनने के बाद पहले प्रति नगर पंचायत के लिए 38-38 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद अब 16-16 लाख रुपये और आ गए हैं। अब एक मैटिरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर में मशीनों की खरीदारी से लेकर बिल्डिंग निर्माण तक में 54 लाख रुपये खर्च होंगे। नगर पंचायत का कचरा रोजाना प्लांट पर एकत्र किया जाएगा और मशीनों द्वारा गीले व सूखे कूड़े का निस्तारण अलग-अलग किया जाएगा। कूड़े से खाद बनेगी और इसे नगर पंचायत द्वारा बेचकर राजस्व में भी बढ़ोत्तरी की जाएगी। (संवाद)
जिले की सभी नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाया जाना है। दो जगहों पर यह काम शुरू भी हो चुका है। इस प्लांट के बनने से नगर पंचायतों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण हो सकेेगा और इस कूड़े से खाद भी बनेगी जो किसानों के प्रयोग में आएगी।
-एकता सिंह, सीडीओ