बाराबंकी। प्रदेश सरकार के निर्देश पर अवैध कब्जों पर बुलडोजर चल रहा है मगर शहर में 50 करोड़ रुपये कीमत की सरकारी जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में हैं। जिलाधिकारी से हुई शिकायत के बाद जब राजस्व विभाग ने मामले की जांच की तो यह खुलासा हुआ है। लेखपाल ने मामले में चौंकाने वाली रिपोर्ट अधिकारियों को दी है। इसमेें जमीन में पुलिस विभाग की भी करोड़ों की जमीन है मगर पुलिस विभाग के अधिकारियों को अपनी इस जमीन के बारे में पता ही नहीं है। इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नही किया जा सकता।
बीते 4 अप्रैल को बंकी के रामभरोसे वर्मा ने डीएम डॉ. आदर्श सिंह से शिकायत की थी कि शहर के बीचोबीच बस स्टैंड के सामने भूमि गाटा संख्या 2612 है। इसका क्षेत्रफल 36646 वर्ग फीट है। शिकायत में कहा गया था कि इस सरकारी जमीन पर फरीद अहमद, जमील अहमद, बब्बू आदि द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। दुकानें तक बनवा ली हैं। डीएम ने इस मामले को गंभीरता से लिया। 18 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय के अपर प्रभारी अधिकारी नजूल ने एसडीएम सदर को पत्र भेजकर अवैध कब्जा हटवाने के लिए जांच की बात कही थी।
एसडीएम के निर्देश पर कानूनगो व लेखपाल ने मामले की जांच की तो दंग रह गए। क्योंकि प्रपत्रों को खंगालाने के बाद वर्तमान हालात देखे गए तो अवैध कब्जा पाया गया। कई दिनों की जांच के बाद 5 मई को लेखपाल रामलौटन ने इसकी रिपोर्ट तैयार की। जांच रिपोर्ट में लेखपाल रामलौटन ने कहा कि पूरा प्रकरण जमीन गाटा संख्या 2612 को लेकर है।
लेखपाल ने रिपोर्ट में कहा है कि इस जमीन का क्षेत्रफल करीब 0.781 हेक्टेयर है और वर्तमान में जमीन की कीमत करीब 50 करोड़ रुपया है। लेखपाल ने बताया कि पूूूरी जमीन उन्हीं तीनों लोगों के कब्जे में है। अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए लेखपाल ने यह भी कहा है कि पुलिस विभाग के नाम दर्ज रकबे अर्थात क्षेत्रफल में कहीं भी पुलिस विभाग का कब्जा या दखल नहीं हैं। पुलिस विभाग की जमीन पर भी अतिक्रमण है।
रिपोर्ट देने के बाद लेखपाल व कानूनगो का ट्रांसफर
18 अप्रैल को शिकायत हुई और डीएम ने जांच के आदेश दिए। 5 मई को लेखपाल रामलौटन ने तीन पन्नों की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया और 7 मई को लेखपाल रामलौटन के साथ कानूनगो आशुतोष उपाध्याय को भी हटा दिया गया। कानूनगो का ट्रांसफर नवाबगंज से मसौली कर दिया गया जबकि लेखपाल रामलौटन को बाराबंकी शहर से हटाकर कोलागहबड़ी में तैनात कर दिया गया। इसे लेकर तहसील में खूब चर्चाएं हो रही हैं।
लेखपाल व कानूनगो का ट्रांसफर इसलिए नहीं किया गया है क्योंकि उन्होंने अवैध कब्जे के खिलाफ रिपोर्ट दी। पूरा प्रकरण संज्ञान में है। जल्द ही सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
-राकेश सिंह, एडीएम
इस बात की जानकारी नहीं है कि बस स्टेशन के पास पुलिस विभाग की कोई जमीन है और उस पर पुलिस का दखल नहीं है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। अगर विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा है तो हटवाया जाएगा।
-पूर्णेंदु सिंह, प्रभारी एसपी/एएसपी