बाराबंकी। ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों से बिना काम लिए ही 35 करोड़ रुपये से अधिक का मानदेय दे दिया गया। यह प्रक्रिया लगातार जारी है। यह हाल तब है जब 50 फीसदी गांवों के पंचायत भवनों में इनके बैठने के साथ कम्प्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट जैसे उपकरणों की व्यवस्था तक नहीं है।
यहां तक की सचिव और प्रधान को माह के अंत में इनके द्वारा प्रतिदिन किए गए कार्य का विवरण लेना है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा और मानदेय दिया जा रहा है। अब तक 587 पंचायत सहायकों को दिसंबर से लेकर फरवरी माह तक मानदेय का भुगतान कर दिया गया है। शेष को मानदेय देने की प्रक्रिया चल रही है।
जिले की सभी 1161 पंचायतों में संचालित पंचायत भवनों में कंप्यूटर, फर्नीचर, प्रिंटर, इंटरनेट आदि की व्यवस्था कराकर पंचायत सहायकों की तैनाती की जानी थी। इसकी व्यवस्था पंचायती राज विभाग को करनी थी। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अभी तक महज 595 ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था की जा सकी है, जबकि 566 पंचायतें ऐसी हैं जहां पर उपकरणों की कोई व्यवस्था आज तक नहीं की जा सकी है। इसके बाद भी 1152 में पंचायत सहायकों की तैनाती कर दी गई है।
यहीं नहीं इनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण सचिव और प्रधान को प्रतिदिन देना है। लेकिन प्रधानों और सचिवों की मिलीभगत से इनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण सिर्फ कागजों पर ही दर्ज किया जा रहा है और विभाग को इसकी सही सूचना तक नहीं दी जा रही है। प्रत्येक सहायक को छह हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से दिसंबर से फरवरी तक करीब 35 करोड़ 22 हजार रुपये का मानदेय का भुगतान भी कर दिया गया।
50 प्रतिशत से अधिक पंचायत भवनों में उपकरण की व्यवस्था हो चुकी है। जहां पर नहीं हैं वहां पर उपकरण की खरीद की जा रही है। पंचायत सहायकों के मानदेय देने के जो निर्देश ऊपर से मिले थे उसी के अनुसार भुगतान किया जा रहा है।
-एकता सिंह, सीडीओ