कई अन्य संदेह के घेरे में हैं। दोनों जालसाज ड्यूटी करने के साथ वेतन भी ले रहे थे। इसकी शिकायत पर डीआईओएस ने सत्यापन कराया तो नौकरी में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
अब कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को दोनों फर्जी बाबुओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। राजकीय हाईस्कूल मित्तई में गौतम प्रसाद ने दिसंबर 2014 में लिपिक पद पर ज्वाइन किया था। गौतम ने डायट कुशीनगर से तबादले के पत्र के आधार पर कार्यभार ग्रहण किया था। ज्वॉइनिंग के बाद वेतन भी मिलने लगा।
एक शिकायत पर जब सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हुई तो पता चला कि गौतम प्रसाद नाम का कोई कर्मचारी कुशीनगर डायट में था ही नहीं। इस संबंध में डायट कुशीनगर के प्रधानाचार्य ने लिखित जानकारी डीआईओएस कार्यालय भेजी।
इसके बाद गौतम प्रसाद के सत्यापन के लिए अपर शिक्षा निदेशक इलाहाबाद व संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच भेजी गई। दोनों जगह की जांच रिपोर्ट में भी गौतम प्रसाद की नियुक्ति फर्जी होने की पुष्टि हुई।
फर्जी नियुक्ति की पोल खुलते देख गौतम प्रसाद गत दो सितंबर को कॉलेज से लापता हो गया। फर्जी तरीके से नौकरी करने का दूसरा मामला राजकीय हाईस्कूल समरदा का है। इस विद्यालय में प्रदीप कुमार नामक व्यक्ति ने डायट कानपुर देहात के तबादला पत्र के आधार पर गत 28 जुलाई को ड्यूटी ज्वाइन की थी।
इसका सत्यापन कानपुर देहात डायट से कराया गया तो तबादला आदेश फर्जी निकला। डायट कानपुर देहात के प्रधानाचार्य ने बताया कि प्रदीप कुमार नाम का कोई कर्मचारी वहां काम नहीं करता था।
इसकी रिपोर्ट डीआईओएस कार्यालय भेजी गई है। अब इसकी जांच अपर शिक्षा निदेशक इलाहाबाद व संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर से कराई जा रही है।