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घटिया दवाओं की आपूर्ति करने वाली छह कंपनियों पर केस

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बाराबंकी। घटिया जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति करने वाली छह फर्मों पर कार्रवाई की गई है। जांच रिपोर्ट में अधोमानक पाए जाने पर औषधि निरीक्षक ने दवाओं की आपूर्ति करने वाली फर्मों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया है। औषधि निरीक्षक की इस कार्रवाई के बाद दवाओं की आपूर्ति करने वाली फर्मों में हड़कंप मच गया है।
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शहर के लइया मंडी स्थित आभा मेडिकल स्टोर से भरा गया डेक्सामेथासोन टैबलेट का नमूना जांच में अधोमानक (घटिया) पाया गया है। इस दवा की आपूर्ति उज्जैन स्थित दानिश हेल्थ केयर फार्मा द्वारा की जाती है। इसी प्रकार रुड़की उत्तराखंड स्थित ओमेगा बायोटेक द्वारा सरकारी अस्पतालों को आपूर्ति की गई सिजेक्जाइम टैबलेट जांच में अधोमानक पाई गई है।
वर्ष 2018 में इसका नमूना भरकर लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया था। रुड़की उत्तराखंड में स्थित सुरक्षा फार्मा एमाक्सिसिलीन टैबलेट की आपूर्ति करती है। इस दवा का नमूना 2018 में स्वास्तिक मेडिकल स्टोर फतेहपुर से भरा गया था। जांच में यह टैबलेट भी औषधि मानकों पर खरी नहीं उतरी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेेेश स्थित टोरक फार्मा द्वारा हीमोफोर्ट नामक सीरप की आपूर्ति की जाती है।
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वर्ष 2019 में इसका नमूना हैदरगढ़ स्थित शक्ति मेडिकल स्टोर से भरा गया था। तत्कालीन औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने सभी दवाओं के नमूने भरकर जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला लखनऊ भेजे थे। जांच में ये सभी दवाएं अधोमानक पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद दवाओं की आपूर्ति करने वाली इन फर्मों के खिलाफ औषधि निरीक्षक ने सीजेएम कोर्ट नम्बर 18 में वाद दायर किया है। (संवाद)
जानवरों की दवाएं भी जांच में हुई फेल
जानवरों को दवाओं की आपूर्ति करने वाली उत्तराखंड स्थित फर्म सेलफरान साइंसेज ने शहर स्थित पशु चिकित्सालय में एलबेंडाजोल सीरप की आपूर्ति की थी। वर्ष 2018 में इस दवा का नमूना भरकर जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में यह भी अधोमानक पाया गया है।
इसके अलावा उत्तराखंड स्थित एम. फार्मा द्वारा जानवरों के लिए एलबेंडाजोल प्लस आइवरमेक्टिन दवाओं की आपूर्ति की जाती है। सिरौलीगौसपुर स्थित जायसवाल मेडिकल स्टोर से इस दवा का नमूना भरकर जांच को भेजा गया था। इसमें यह दवा अधोमानक पाई गई है।
बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर संचालकों पर भी केस
शासन स्तर पर हुई शिकायत में औषधि निरीक्षकों की टीम ने सिहाली स्थित सुशील और लल्लन यादव के मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा था। जांच में दोनों मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस के संचालित होते पाए गए थे। इसके अलावा शहर के पीरबटावन मोहल्ले में अमित गुप्ता द्वारा बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर का संचालन किया जा रहा था।
वहीं हैदरगढ़ स्थित अमित यादव का मेडिकल स्टोर जांच में बिना लाइसेंस के संचालित होता पाया गया था। इसके अलावा नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति करने वाले सफदरगंज निवासी विपिन वर्मा के खिलाफ भी सीजेेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है।
तत्कालीन औषधि निरीक्षक ने छह दवाओं के नमूनेे भरकर जांच के लिए भेजे थे। इनमें दो दवाएं जानवरों की थी। इन सभी की जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच में ये सभी दवाएं अधोमानक यानी इनकी गुणवत्ता औषधि मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है।
इस पर इन दवाओं की आपूर्ति करने वाली फर्मों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया गया है। इसके अलावा बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर संचालित करने और नकली इंजेक्शन बेचने वालों पर भी अदालत में वाद दायर किया गया है।
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-सीमा सिंह, औषधि निरीक्षक
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