बाराबंकी। अगर आप 20 तारीख के बाद बस से कहीं यात्रा करने का मन बना रहे हैं तो सावधान हो जाइए। क्योंकि न बसें ढूंढे मिलेंगी न निजी वाहन। ऐसा इसलिए है कि क्योंकि इस बार बाराबंकी डिपो की 90 फीसदी बसें 20 फरवरी से चार मार्च तक चुनाव निपटाएंगी। जबकि निजी वाहनों की ड्यूटी चुनाव में लगा दी गई है। बसों को चुनाव में लगाए जाने को लेकर परिवहन निगम के अधिकारी भी हलकान हैं। अधिकारियों की मानें तो इन 15 दिनों में डेढ़ करोड़ रुपये की आमदनी प्रभावित होगी।
बाराबंकी डिपो में 119 अनुबंधित बसों का संचालन होता है। इस बार चुनाव आयोग ने पोलिंग पार्टियों को मतदान स्थलों तक पहुंचाने के लिए ट्रक व डीसीएम की जगह बसें लगाने का फरमान सुनाया है। इस आदेश के बाद एआरटीओ ने डिपो की करीब सौ बसों को नोटिस भेज दिया है। गैर जिलों में तीसरे चरण का चुनाव कराने के लिए 20 फरवरी को बसों को रवाना किया जाएगा।
इसके बाद 23 फरवरी को चौथे चरण के चुनाव कराने के लिए बसें गैर जिले में ही रहेंगी। गैर जिले में चुनाव कराने के बाद यह बसें जिले में पांचवें चरण का मतदान कराएंगी। इसके बाद तीन मार्च को छठे चरण का चुनाव कराने के लिए गैर जिलों में रहेंगी। इनकी वापसी चार मार्च को होगी।
परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस वर्मा स्वीकार करते हैं कि 15 दिनों तक डिपो की 90 फीसदी बसें चुनाव में प्रयोग की जाएंगी। इन दौरान करीब 15 बसें ही डिपो में शेष रह जाएंगी। इस बाबत एआरटीओ प्रशासन पंकज सिंह का कहना है कि परिवहन आयुक्त व मंडलायुक्त के कड़े निर्देश हैं कि इस बार मतदान कार्मिकों को पोलिंग बूथों तक बसों से ही भेजवाया जाए। इसलिए परिवहन निगम की अनुबंधित बसों का अधिग्रहण किया गया है। संबंधित बसों के अधिग्रहण के लिए पूर्व में ही नोटिस जारी किया गया था।