बाराबंकी। सुंदरनगर, कोड़री व लालपुरवा गांव के 30 परिवारों ने गांव के पास ही तटबंध पर डेरा जमा लिया है। तमाम प्रयासों के बाद भी उन्होंने बाढ़ आश्रय भवन में जाने से इंकार कर दिया। मोहम्मद आलम का कहना है कि उनके पास 20 बकरी, चार पशु व छह मुर्गी हैं। आश्रय भवन में जाएंगे तो उनके पशुओं की देखभाल कौन करेगा। इसी तरह अन्य लोगों ने भी पशुओं के साथ ही घर गृहस्थी के सामान की निगरानी की बात कहते हुए आश्रय भवन जाने से इंकार कर दिया है। ऐसे में प्रशासन को तटबंध पर ही बिजली-पानी के इंतजाम कराने पड़ रहे हैं।
बाढ़ के पानी से बचने के लिए तटबंध पर पहुंचे ग्रामीण तिरपाल तानकर व झोपड़ी बनाकर रहने लगे हैं। तटबंध पर शरण लिए अनवर, हकीम, बरकत अली, जनकलाल, ईश्वरदीन, कल्लू, कुंवारे, सागर चौहान, राजकुमार व विनीत ने आश्रय भवन जाने से इंकार कर दिया। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर बीडीओ देवेंद्र प्रताप सिंह ने तटबंध पर ही जरूरत की मूलभूत व्यवस्थाएं मुहैया कराने का काम शुरू किया गया। बाढ़ पीड़ितों की निगरानी के लिए तहसीलदार विपुल सिंह, सीओ फतेहपुर जगतराम कनौजिया, सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजर्षि त्रिपाठी, एडीओ पंचायत राजेंद्र प्रसाद यादव, सचिव विभा गुप्ता व आलोक कुमार नियमित तौर पर निरीक्षण कर नजर बनाए हुए हैं।
सरयू नदी का जल स्तर खतरे के निशान 106.070 मीटर से 47 मीटर अधिक पहुंच गया है। बृहस्पतिवार शाम को नदी का जलस्तर 106.540 मीटर दर्ज हुआ। गिराजा व शारदा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण जिले में बाढ़ के हालात और बिगड़ने के आसार जताए जाने लगे हैं। नदी का पानी तटवर्तीय इलाके के एक दर्जन से अधिक गांवों में घुसने लगा है। बाढ़ का पानी अस्पताल व स्कूलों में भरने लगा है। 30 से ज्यादा गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इन गांवों के खेतों व सड़क मार्ग में पानी भरने लगा है।
बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए तटवर्तीय गांव के लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना भी शुरू कर दिया है। सरयू नदी का जल स्तर बृहस्पतिवार को कम नहीं हुआ। इनमें रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर के आसपास के गांवों में ज्यादा पानी है। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरहा व प्राथमिक विद्यालय तेलवारी परिसर में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया। तेलवारी विद्यालय को अब कंपोजिट विद्यालय गिदरापुर जोड़ा गया है। तेलवारी, गोबरहा, भैरवकोल, सरायसुर्जन, कहारन पुरवा, बघौली पुरवा, सनावा, सिरौलीगुंग, रायपुर, माझा व परसवाल में पानी भरा है। तेज हुई कटान के कारण खेतिहर जमीन भी नदी में समाते जा रहे हैं।
निगरानी के लिए बाढ़ चौकी पर लेखपालों की तैनाती कर दी गई है। बाढ़ कार्य खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने बताया कि फिलहाल नदी का पानी 106.540 मीटर पर स्थिर हो गया है। बारिश न हुई तो पानी घट भी सकता है।
सूरतगंज। हेतमापुर गांव सरयू नदी के एकदम किनारे है। नदी की लहरें लोगों को डरा रही है। बेलहरी, बाबापुरवा, केदारीपुर, लालपुरवा, मदरहा, क्योली पुरवा, पूरनपुर, सुंदरनगर, बलाईपुर, संकटापुर, गुडियन पुरवा गांवों व आवागमन के रास्तों पर पानी भरा है।