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यमुना भी खतरे के निशान से नीचे, डूबी फसलें बर्बाद

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फोटो 22 बीएनडीपी-13 : तिंदवारी क्षेत्र में बाढ़ से चौपट हुई फसलें।
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यमुना भी खतरे के निशान से नीचे, डूबी फसलें बर्बाद
पानी घटने के बाद बचा सामान समेटने में जुटे लोग, बाढ़ पीड़ितों को मिल रही मदद नाकाफी
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। केन के बाद अब यमुना नदी भी खतरे के निशान से नीचे आ गई है। इनके जलस्तर में और कमी आने का सिलसिला जारी है। उधर, कई दिनों तक डूबे रहे खेत और मकानों में अभी भी पानी और दलदल है। फसलें लगभग खत्म हो चुकी हैं। प्रभावित गांवों में धराशायी मकानों का मलवा समेटा जा रहा है। उधर, बड़ी संख्या में अभी भी बाढ़ प्रभावित राहत शिविरों या खुले आसमान तले बनाए अस्थाई ठिकानों में डेरा डाले हैं।
यमुना और केन की बाढ़ से जिले की पैलानी तहसील क्षेत्र के खप्टिहाकलां, पैलानी, जसपुरा और इन गांवों के मजरों आदि में भारी तबाही हुई है। उधर, बबेरू व कमासिन क्षेत्र के कई गांव भी यमुना नदी की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ितों को पहुंचाई जा रही राहत या मदद नाकाफी साबित हो रही है। राजस्व विभाग के अधिकारी व कर्मचारी बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में नजर रखे हुए हैं। नुकसान का सर्वे और आंकलन कराया जा रहा है।
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केंद्रीय जल आयोग द्वारा शनिवार को शाम जारी बाढ़ बुलेटिन में यमुना नदी के जल स्तर में और कमी आने का पूर्वानुमान बताया है। अधिशासी अभियंता मनोज कुमार द्वारा जारी बुलेटिन में बताया गया है कि शनिवार को चिल्ला घाट में यमुना नदी का जल स्तर 100.72 मीटर पर था। देर रात यह घटकर 99 मीटर पर आ जाएगा। खतरे का निशान 100 मीटर पर है। तिंदवारी प्रतिनिधि के मुताबिक बेंदा क्षेत्र में नदी का पानी उतर जाने के बाद भी खेतों में जलभराव है। ज्वार, अरहर, धान, मूंग, तिल आदि की फसलें कई दिन तक डूबी रहने से लगभग खत्म हो गई हैं। किसानों को भारी चपत लगी है। उधर, लगभग रोजाना बारिश हो रही है। ऐसे में ऊंचे स्थानों पर खुले आसमान तले अस्थाई आशियाने बनाकर डेरा डाले बाढ़ पीड़ितों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों की बताई परेशानी
बांदा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की बांदा जिला काउंसिल ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर बाढ़ पीड़ितों को हो रही परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्हें तत्काल राहत और बाढ़ के दौरान दैवी आपदाओं से मरने वाले आश्रितों को पांच लाख रुपये अनुदान दिए जाने की मांग की है। ज्ञापन में बताया है कि पार्टी के दल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया है। यमुना और केन तथा उनकी सहायक नदियों व नालों ने हमीरपुर से लेकर बांदा व चित्रकूट तक तबाही मचाई है। बड़ी तादाद में लोग सपरिवार मवेशियों के साथ सड़कों पर या ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। उनके रहने या खाने-पीने का प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किए। भाकपा नेताओं ने बांधों के रखरखाव के नाम पर हुए घोटाले की भी जांच की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में राष्ट्रीय परिषद के सदस्य डा.रामचंद्र सरस सहित विनय कुमार, जिला सचिव श्यामसुंदर राजपूत, लवलेश प्रजापति, रामेंद्र वर्मा, भैरव प्रसाद, विजनेश कुमार आदि शामिल रहे।
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सर्वे और राहत वितरण शुरू कराने की मांग
बांदा। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का सर्वे तत्काल शुरू कराकर राहत राशि वितरित किए जाने और पीड़ितों को मुख्यमंत्री योजना से आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। अन्ना प्रथा, सड़कों के निर्माण या गड्ढामुक्त करने में हुए भ्रष्टाचार, सरकारी डाक्टरों द्वारा निजी प्रैक्टिस, नरैनी सीएचसी में गंदगी, किसान दिवसों की उपेक्षा आदि के मुद्दे भी शामिल किए हैं। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष बलराम तिवारी, मंडल अध्यक्ष बैजनाथ अवस्थी सहित महेंद्र सिंह, आलोपीदीन, जेपी फौजी, अजमुद्दीन, सरोज कुशवाहा, धर्मराज, प्रेमनारायण, महेंद्र त्रिपाठी, ध्रुव सिंह, करण सिंह, महेश्वरी प्रसाद, रामस्वरूप आदि शामिल रहे।
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बुंदेलखंड किसान यूनियन आज बांटेगी सामग्री
बांदा। बुंदेलखंड किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने शनिवार को मुख्यालय में कैंप लगाकर बाढ़ पीड़ितों के लिए सामग्री एकत्रित की। राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार को जसपुरा व पैलानी में बाढ़ क्षेत्रों का भ्रमण कर राहत सामग्री बांटी जाएगी। शीघ्र सर्वे और राहत वितरण के लिए प्रशासन से मांग या आंदोलन किया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों को हिम्मत से काम लेने का भरोसा दिलाया। कहा कि अधिकारी नावों में बैठकर सिर्फ सेल्फी ले रहे हैं। लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, राजा मनीष तिवारी, मोहित सिंह, गुलबहार सिंह चौहान आदि शामिल रहे।
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