बांदा। बाईपास भूमि अधिग्रहण के मामले की जांच में एक्सईएन ने एडीएम को अपनी आख्या दी है। उन्होंने कहा है कि आपसी सहमति के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री की गई है। जबकि, आपसी सहमति से किसी भी दूसरे व्यक्ति की जमीन बेचने का कोई नियम नहीं है। यदि बेची भी तो मुआवजा भू-स्वामी के खाते में ही आना चाहिए।
बसपा शासन काल में बनी बाईपास रोड में मुआवजा को लेकर किए गए भ्रष्टाचार के मामले में नया मोड़ आ गया है। लोक निर्माण विभाग के बाबू, जेई,एई ने किसान को मुआवजा देने के बजाए पहले अपने करीबियों के नाम जमीन कराई और फि्र बनी सड़क की रजिस्ट्री कराकर करीब 85 लाख रुपये मुआवजा डकार लिया। इतना ही नहीं साढ़े चार विस्वा जमीन का दो बार में तीन-तीन विस्वा की रजिस्ट्री हुई। आज इसका दाखिल खारिज भी नहीं हुआ। इस घपले की जांच एडीएम राजेश कुमार की अध्यक्षता में कमेटी कर रही है। एडीएम ने प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन मनोज कुमार पांडेय से आख्या मांगी। इस पर एक्सईएन ने कहा है कि यह जमीन सुधीर कुमार व अनुज कुमार वर्मा के नाम थी। अनुज वर्मा के भाई विमल वर्मा पीडब्ल्यूडी में लिपिक हैं। 15 जून 2021 को सुधीर कुमार ने विभाग के नाम रजिस्ट्री कर 43 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा लिया। फिर शेष तीन विस्वा जमीन सुधीर कुमार व अनुज कुमार के नाम थी, जिसकी दोनों की आपसी सहमति के आधार पर छह जुलाई 2021 को जमीन अधिग्रहीत की गई और 43 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा दिया गया।