बांदा। अखाडे़ न सिर्फ मानव बल बल्कि भाईचारा और सद्भावना के केंद्र रहे हैं। कुश्ती हमारी वीरता की पुरानी पहचान है। गांवों में यह विरासत अभी भी बरकरार है। यह बात जखनी गांव में आयोजित दंगल के उद्घाटन समारोह में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (होमगार्ड) विजय कुमार ने कही।
महानिदेशक खुद अखाडे़ में उतरे और पहलवानों के हाथ मिलाकर कुश्ती की औपचारिक शुरुआत कराई। सुशील पहलवान (जखनी) ने बाबू (खटिया) को पराजित किया। बांदा के सतीश ने कमलेश को पटकनी दी।
मूंगुस के नंदलाल ने कपिल को हराया। बरकत अली और ब्रजेश के बीच कुश्ती बराबरी पर छूटी। जखनी के भूपेंद्र उर्फ काकू को कोई जोड़ीदार नहीं मिला। कुश्तियों का निर्णय पूर्व पहलवान सुलखान सिंह, रामसजीवन पांडेय, रफीक उर्फ कालीघटा, बकरीद रामा उल्ला आदि ने किया।
दंगल में सामाजिक कार्यकर्ता डा. शेख सादी जमां ने कहा कि जखनी ऐतिहासिक गांव है। यहां सब मिलजुल कर गांव का नाम रोशन किए हुए हैं। जखनी जल ग्राम समिति के उमाशंकर पांडेय ने कहा कि उनके गांव में कुश्ती कलां में भी बड़ा नाम कमाया है। यहां के युवाओं को ऐसे आयोजनों के लिए और प्रेरित किया जाएगा।
इस अवसर पर निर्भय सिंह, अशोक अवस्थी, अली मोहम्मद, मामून खां, पूर्व प्रधान रज्जू खां, चुन्नू सिंह, दिनेश सिंह, नसीरूद्दीन, रामबली, ओमप्रकाश, गजेंद्र त्रिपाठी, सिराज खां, कल्लू यादव, सुनील मसुरहा, प्रेम प्रकाश पांडेय, अजय शिवहरे आदि उपस्थित रहे। दंगल आयोजक सिराज खां ने सभी का आभार जताया। इसके पूर्व महानिदेशक ने जल ग्राम समिति के विजय कुटी कार्यालय का उद्घाटन किया।