अतर्रा में जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते वक्ता।
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बुंदेलखंड में महिला सशक्तीकरण अभियान महज दिवा स्वप्न है। यहां आज भी महिलाएं पुराने रूढ़िवादी रीति-रिवाजों की शिकार हैं। अपने साथ होने वाले भेदभाव का महिलाओं को प्रतिकार करना चाहिए। यह बात विद्याधाम समिति द्वारा अतर्रा नगर में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में उत्तराखंड से आईं प्रयास संस्था की निदेशक सुनीता शाही ने कहीं।
बुंदेलखंड में महिलाओं की स्थिति विषय पर आयोजित जन संवाद में सर्वेक्षणों का हवाला देकर महिलाओं की दुर्दशा बयां की गई। गुनिया सल्यूशन, दिल्ली के निदेशक सलभ श्रीवास्तव ने कहा कि विद्याधाम समिति द्वारा बुंदेलखंड में महिलाओं पर किए गए सर्वेक्षण काफी चौंकाने वाले हैं।
हालांकि समिति महिलाओं के लिए लगातार प्रशिक्षण भी आयोजित कर रही है। व्यवसायिक प्रशिक्षण को और विस्तार देने की जरूरत है। मार्ग श्री ट्रस्ट, झांसी के निदेशक ध्रुव सिंह यादव ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर अवसर दिए जाने की वकालत की।
उत्थान संस्थान निदेशक डॉ.जनार्दन त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखंड में मुख्य आजीविका का साधन कृषि है। महिलाओं को भी खेती में बराबरी की भागीदारी करना चाहिए। कार्यक्रम के मेजबान और विद्याधाम समिति के मंत्री राजाभइया ने समिति के सर्वेक्षणों और कार्यक्रमों की जानकारी दी।
उन्होंने सर्वेक्षणों का संदर्भ देते हुए बताया कि बुंदेलखंड में आज भी लिंग भेद, कन्या भ्रूण हत्या, असमानता, पलायन, बलात्कार इत्यादि बरकरार हैं। यहां अधिकांश महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं है।