बांदा। बीमारियों के मौसम में मंडल मुख्यालय के महिला अस्पताल में दवाओं का भारी टोटा है। हालात यह है कि 358 प्रकार की दवाओं में अस्पताल के स्टाक में 229 प्रकार की दवाएं खत्म हो गई हैं। सिर्फ 129 दवाओं पर ही रोजाना आ रहे हजारों मरीजों का इलाज हो रहा है। यह खुलासा शनिवार को विधायक विवेक कुमार सिंह के जिला अस्पताल के निरीक्षण में हुआ।
विधायक को कई मरीजों ने बताया कि दवाएं अस्पताल से नहीं मिल रहीं। बाजार से लाने को लिखा जा रहा है। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती रामकली (भुसासी) ने यही शिकायत की। उधर, इस बारे में मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. ऊषा सिंह ने विधायक को बताया कि अस्पताल में 358 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 129 तरह की दवाएं बची हैं।
दवाओं की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन नहीं आ रही हैं। ऐसे में बाहर की दवाएं लिखना मजबूरी है। उधर, जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केएल पांडेय ने कहा कि कुछ मरीजों को चक्कर आने की शिकायत है। इसकी दवा अस्पताल में नहीं है।
इस मामूली मर्ज पर रेफर भी नहीं किया जा सकता। मजबूरन दवा बाहर से मंगानी पड़ रही है। विधायक ने लखनऊ में अधिकारियों से बात कर दवाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. किशोरी लाल ने बताया कि शासन ने यहां डॉ. अनीता और डॉ. संगीता की नियुक्ति की है, लेकिन दोनों ने ही यहां ज्वाइन नहीं किया।
निरीक्षण में विधायक को अस्पताल में जगह-जगह गंदगी भी मिली। वार्डों के शौचालय से दुर्गंध आ रही थी। विधायक ने रोष जताते हुए कहा कि ऐसे वातावरण में तो यहां मरीज स्वस्थ होने के बजाय और बीमार होंगे।
अस्पताल के बाहर परिसर में बेतरतीब खड़ी एंबुलेंस और अन्य वाहनों पर लग रहे जाम से नाराज विधायक ने सिविल लाइन चौकी प्रभारी को फोन पर वाहन सीज करने को कहा। विधायक के साथ निरीक्षण में उनके प्रतिनिधि खुर्शीद अहमद खां, धनंजय सिंह उर्फ टीटू, लोकेंद्र प्रताप सिंह, संजू शास्त्री भी साथ रहे।